विद्या आधारित श्लोक
संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हिन्दी अनुवाद सहित उल्लेख यहां किया गया है ।
श्लोक :- 01.
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तम् धनम् ,
विद्याभोगकरी यश: सुखकरी विद्या गुरूणाम् गुरु |
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता '
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्या- विहीन: पशु: ।।
हिंदी अर्थ : - विद्या मनुष्य की सुंदरता है , यह अत्यंत छुपा हुआ धन है | विद्या उपभोग का साधन , यश और सुख उपलब्ध कराने वाली है , विद्या गुरुओं की गुरू है | अन्य प्रदेश जाने पर विद्या भाई की तरह साथ देती है , विद्या सबसे बड़ी देवता है | राजमहलों में विद्या की ही पूजा की जाती है धन की नहीं , विद्या से रहित व्यक्ति पशु के समान होता है |
श्लोक :- 02.
विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रय: ,
धेनु: कामदुघा रतिश्च विरहे नेत्रं तृतीयं च सा |
सत्कारायतनं कुलस्य महिमा रत्नैर्विना भूषणम् ,
तस्मादन्यमुपेक्ष्य सर्वविषयं विद्याधिकारं कुरु ||
हिंदी अर्थ :- विद्या मनुष्य का यश है , अच्छे दिन बीत जाने पर सहारा है , विद्या इच्छानुसार फल देने वाली कामधेनु गाय के समान है , विद्या रति और विरह के समय तीसरा नेत्र है | विद्या परिवार का सम्मान बढ़ाने वाली होती है , विद्या, बिना रत्नों का आभूषण है इसलिए सबकी उपेक्षा करके विद्या पर ही अधिकार करना चाहिए |
श्लोक :- 03.
येषां न विद्या न तपो न दानं ,
ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्म: |
ते मर्त्यलोके भुवीभारभूता ,
मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ||
हिंदी अर्थ :- जिन व्यक्तियों के पास विद्या , तप , दान , ज्ञान , शिष्टाचार , गुण और धर्म (कर्तव्य) नही है | ऐसे व्यक्ति इस संसार में और पृथ्वी पर भाररूपी होते हुए मनुष्य के रूप में जानवर की तरह विचरण करते है |
श्लोक :- 04.
न चौराहार्यं न च राजहार्यं ,
न भ्रातृभाज्यम् न च भारकारि |
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं ,
विद्याधनं सर्वधनप्रधानम् ||
हिंदी अर्थ :- विद्या रूपी धन अन्य सभी धनों में से प्रधान है क्योंकि इसे न तो चोर चुरा सकता है , न ही राजा छीन सकता है , न ही भाइयों में बांटा जा सकता है और न ही विद्या अत्यधिक भार बढ़ाने वाली है | विद्या को जितनी हम खर्च करेंगे उतनी ही इसमें वृद्धि होती है |