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Wednesday, 5 October 2022

गुण सन्धि:

 गुण सन्धि 

परिभाषा :- यदि " अ / आ " के पश्चात् हृस्व / दीर्घ " इ , उ , ऋ , लृ " हो तो पूर्व - पर वर्णों के स्थान पर क्रमशः " ए , ओ , अर् , अल् " आदेश होता है | ( अर्थात्  ए , ओ , अर् , अल् को गुण कहा जाता है )

सूत्र : " आद् गुण: " |

अ /आ   +  इ / ई     =  ए 
अ / आ  +  उ / ऊ    =  ओ 
अ / आ  +  ऋ / ॠ  =  अर् 
अ / आ  +  लृ           =  अल् 

उदाहरण :-  

रमा   +  ईश: =     रमेश: ( अ + ई = ए ) 

गंगा  +  उदकम् =  गंगोदकम् ( आ + उ = ओ ) 

हित  +  उपदेश: = हितोपदेश: ( अ + उ = ओ ) 

महा  +  ऋषि =     महर्षि:  ( आ + ऋ = अर् ) 

तव   +  लृकार: =  तवल्कार: ( अ + लृ = अल् ) 

यहाँ पर बहुत ही आसान तरीके से समझाया गया है एक बार क्लिक कीजिये :-

धन   +  इन्द्र:    =  धनेन्द्र: 

उप   +  इन्द्र:    =   उपेन्द्र: 

पुष्प  +  इन्द्र:    =  पुष्पेन्द्र: 

गज   +  इन्द्र:    =  गजेन्द्र: 

सुर    +  इन्द्र:    =  सुरेन्द्र: 

दिन   +  ईश:     =  दिनेश: 

राम   +  ईश्वर:    =  रामेश्वर: 

नर    +  ईश:      =  नरेश: 

सूर्य   +  उदय:    =  सूर्योदय: 

महा  +  उत्सव:  =  महोत्सव: 

महा  +  ऊर्मि:    =  महोर्मि: 

नव   +  ऊढा      =  नवोढ़ा 

पुरुष +  उत्तम:    =  पुरुषोत्तम: 

यथा  +  उक्तम्    =  यथोक्तम् 

चंद्र   +  उदय:     =  चन्द्रोदय: 

पर    +  उपकार: =  परोपकार: 

सप्त +  ऋषि:     =  सप्तर्षि: 

महा +  ऋषि:      =  महर्षि: 

देव  +  ऋषि:      =  देवर्षि: 

विशेष :- यहाँ पर " अ / आ + ऋ = अर् होता है प्रथम शब्द का अंतिम स्वर और अगले शब्द का पहला स्वर मिलकर '' अर् '' होता है तथा '' अर् '' का '' र् '' हलन्त होता है अतः '' र् '' अगले वर्ण के ऊपर चला जाता है |  

राजा  +  ऋषि:     = राजर्षि: 

ब्रह्म   +  ऋषि:     = ब्रह्मर्षि: 

वर्षा   +  ऋतु:      = वर्षर्तु: 

ग्रीष्म  +  ऋतु:     = ग्रीष्मर्तु: 

शीत   +  ऋतु:     = शीतर्तु: 

वसंत  +  ऋतु:     = वसन्तर्तु: 

महा    +  लृकार:  = महल्कार: 

माला  +  लृकार:  = मालल्कार: 

मम    +  लृकार:  = ममल्कार: 

नव    +  लृकार:  = नवल्कार: 

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