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Tuesday, 4 October 2022

दीर्घ सन्धि:

 दीर्घ संधि 

परिभाषा :-  यदि पूर्व पदान्त हृस्व / दीर्घ अ , इ ,उ , ऋ , के पश्चात कोई सजातीय वर्ण हो तो पूर्व -पर वर्णों के स्थान पर क्रमशः आ , ई , ऊ , ऋ आदेश होगा | 

सूत्र :- अक: सवर्णे दीर्घ: |  

अ  +  अ = आ          इ + इ = ई 

अ  + आ = आ          इ + ई = ई 

आ +  अ = आ          ई + इ = ई 

आ + आ = आ          ई + ई = ई 


उ  + उ  = ऊ             ऋ + ऋ = ॠ

उ  + ऊ = ऊ             ऋ + ॠ = ॠ 

ऊ + उ  = ऊ             ॠ + ऋ = ॠ 

ऊ + ऊ = ऊ             ॠ + ॠ = ॠ 

उदाहरण :- 

हिम     + अंशु:     =   हिमांशु: 

परम    + आनंद:  = परमानन्द: 

शिक्षा   + अर्थी     = शिक्षार्थी 

दैत्य     + अरि:     = दैत्यारि: 

विद्या   + आलय:  = विद्यालय: 

दया     + आनन्द: = दयानन्द: 

सत्य    +  अर्थी     = सत्यार्थी 

न        +  अस्ति    = नास्ति 

हिम    + आलय:   = हिमालय: 

प्रधान + आचार्य:  = प्रधानाचार्य: 

श्री     +   ईश:      = श्रीश: 

कपि  +   ईश:      = कपीश: 

रवी    +   इन्द्र:     = रवीन्द्र: 

हरि    +   ईश:      = हरीश: 

गिरि   +  इन्द्र       = गिरीन्द्र: 

सति   +  ईश:       = सतीश: 

मुनि   +  इन्द्र:      = मुनीन्द्र: 

रजनी +  ईश:       = रजनीश: 

शची   +  इन्द्र:      = शचीन्द्र: 

विष्णु  +  उदय:     = विष्णूदय: 

गुरु     +  उपदेश:  = गुरूपदेश: 

वधू     +  उत्सव:   = वधूत्सव: 

लघु    +  उत्तरम्    = लघूत्तरम् 

साधु   +  इक्तम्     = साधूक्तम् 

सु       +  उक्ति:     = सूक्ति: 

भानू   +  उदय:     = भानूदय: 

पितृ    +  ऋकार:  = पितॄकार:

पितृ    +  ऋणम्    = पितॄणम् 

मातृ    +  ऋकार:  = मातॄकार: 

मातृ    +  ऋणम्   = मातॄणम् 

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