ठक् प्रत्यय
* ठक् प्रत्यय तद्धित् प्रत्यय कहलाता है क्योंकि इसका प्रयोग शब्द के साथ किया जाता है |
* इस प्रत्यय का प्रयोग भाववाचक संज्ञा और विशेषण के रूप में किया जाता है |
* इस प्रत्यय का प्रयोग होते समय " ठक् " को " इक " हो जाता है |
* इस प्रत्यय का प्रयोग होने पर शब्द के प्रारंभिक स्वर को वृद्धि आदेश होता है अर्थात् अ को आ , इ / ई / ए को ऐ , उ / ऊ / ओ को औ तथा ऋ को आर् आदेश हो जाता है |
* इस प्रत्यय के रूप तीनो लिंगो में चलते है :- पुल्लिंग ( बालक की तरह ) , स्त्रीलिंग ( नदी की तरह ) , नपुंसकलिंग ( फल की तरह )
भूत + ठक् = भौतिक: ( पुल्लिंग ) भौतिकी ( स्त्रीलिंग ) भौतिकम् ( नपुंसकलिंग )
यहां पर समझाया गया है एक बार क्लिक करके देखो :-
उदाहरण :-
शब्द प्रत्यय
अस्ति + ठक् = आस्तिक
भूत + ठक् = भौतिक
वर्ष + ठक् = वार्षिक
नगर + ठक् = नागरिक
समाज + ठक् = सामाजिक
इतिहास + ठक् = ऐतिहासिक
उद्योग + ठक् = औद्योगिक
दिन + ठक् = दैनिक
धर्म + ठक् = धार्मिक
सप्ताह + ठक् = साप्ताहिक
दर्शन + ठक् = दार्शनिक
अर्थ + ठक् = आर्थिक
संस्कृत + ठक् = सांस्कृतिक
मास + ठक् = मासिक
लोक + ठक् = लौकिक
पुराण + ठक् = पौराणिक
व्यवहार + ठक् = व्यावहारिक
प्रमाण + ठक् = प्रामाणिक
प्रथम + ठक् = प्राथमिक
वेद + ठक् = वैदिक
कृति + ठक् = कार्तिक
सर्वभूमि + ठक् = सार्वभौमिक ( यहाँ पर " सर्व "और " भूमि " दो शब्द है इसलिए दोनो शब्दो के प्रथम स्वर को वृद्धि होगी अर्थात् सर्व को " सार्व "और भूमि को " भौमि " )