Monday, 3 October 2022

ठक् प्रत्यय , Thak pratyay

 ठक् प्रत्यय

* ठक् प्रत्यय तद्धित् प्रत्यय कहलाता है क्योंकि इसका प्रयोग शब्द के साथ किया जाता है | 

* इस प्रत्यय का प्रयोग भाववाचक संज्ञा और विशेषण के रूप में किया जाता है | 

* इस प्रत्यय का प्रयोग होते समय " ठक् " को " इक " हो जाता है | 

* इस प्रत्यय का प्रयोग होने पर शब्द के प्रारंभिक स्वर को वृद्धि आदेश होता है अर्थात् को , इ / ई / ए को , उ / ऊ / ओ को तथा को आर् आदेश हो जाता है | 

* इस प्रत्यय के रूप तीनो लिंगो में चलते है :- पुल्लिंग ( बालक की तरह ) , स्त्रीलिंग ( नदी की तरह ) , नपुंसकलिंग ( फल की तरह ) 

 भूत + ठक्  = भौतिक: ( पुल्लिंग ) भौतिकी ( स्त्रीलिंग )  भौतिकम् ( नपुंसकलिंग ) 

यहां पर समझाया गया है एक बार क्लिक करके देखो :-

उदाहरण :- 
शब्द           प्रत्यय

अस्ति     +  ठक्  =  आस्तिक  

भूत        +  ठक्  =  भौतिक 

वर्ष         +  ठक्  =  वार्षिक 

नगर       +  ठक्  =  नागरिक 

समाज    +  ठक्  =  सामाजिक 

इतिहास  +  ठक्  =  ऐतिहासिक 

उद्योग     +  ठक्  =  औद्योगिक 

दिन        +  ठक्  =  दैनिक 

धर्म         +  ठक्  =  धार्मिक 

सप्ताह    +  ठक्  =  साप्ताहिक 

दर्शन      +  ठक्  =  दार्शनिक 

अर्थ        +  ठक्  =  आर्थिक 

संस्कृत    +  ठक्  =  सांस्कृतिक 

मास        +  ठक्  =  मासिक 

लोक       +  ठक्  =  लौकिक 

पुराण      +  ठक्  =  पौराणिक 

व्यवहार   +  ठक्  =  व्यावहारिक 

प्रमाण     +  ठक्  =  प्रामाणिक 

प्रथम       +  ठक्  =  प्राथमिक 

वेद          +  ठक्  =  वैदिक 

कृति        +  ठक्  =  कार्तिक 

सर्वभूमि   +  ठक्  =  सार्वभौमिक ( यहाँ पर " सर्व "और " भूमि " दो शब्द है इसलिए दोनो शब्दो के प्रथम स्वर को वृद्धि होगी अर्थात् सर्व को " सार्व "और भूमि को " भौमि " ) 

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