विद्या आधारित श्लोक
संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हिन्दी अनुवाद सहित उल्लेख यहां किया गया है ।
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संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हिन्दी अनुवाद सहित उल्लेख यहां किया गया है ।
प्रश्न निर्माण करना बहुत ही सरल है | सिर्फ हमे शब्द रूप का ज्ञान होना आवश्यक है , जिसमें अकारान्त ( पुलिङ्ग ) , आकारान्त ( स्त्रीलिंग ) , ईकारांत (स्त्रीलिंग ) , और नपुंसकलिंग शब्द रूप शामिल है |
प्रश्न निर्माण किम् शब्द के शब्द रूप से होता है अतः हमें किम् शब्द के शब्द रूप याद होना बहुत ही आवश्यक है |
यदि स्थान वाचक शब्द हो तो " कुत्र " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |
यदि संख्या वाचक शब्द हो तो " कति " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है -
रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्न निर्माणं कुरुत -
01. वसन्ते सरसा: रसाला: लसन्ति |
02. सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता |
03. लुब्धया बालिकया लुब्धस्य फलं प्राप्तम् |
04. खलानाम् मैत्री आरम्भगुर्वी भवति |
05. मोदकानि पूजानिमित्तानि रचितानि आसन् |
06. जन्तो: मूढ़ता निद्रा भवति |
07. सज्जना: एव शशिकिरणसमा: भवन्ति |(CBSE 2011)
08. गुरुवचनम् उपादेयं भवति | ( CBSE 2011 )
09. प्राणिनाम् मूढ़ता निद्रा कथिता|(CBSE 2011)
10. साधुजनमैत्री सुखदा भवति | (CBSE 2012 )
11. विनितस्य जनस्य वशे प्राणिगण:|(CBSE 2012)
इन से संबंधित विडियो के लिए यहां क्लिक करें
12. लोके चक्षुष: दानं दुष्करं अस्ति |(CBSE 2014)
13. अनृतं वदसि चेत् काक: दशेत् |(CBSE 2014)
14. सर्वेषाम् एव महत्त्वं विद्यते | ( CBSE 2015 )
15. मम पिच्छानाम् अपूर्वं सौन्दर्यम्|(CBSE 2016)
16. छात्रा: उद्याने क्रीडन्ति |
17. अस्माकं विद्यालये एक सहस्र पञ्च शतं छात्रा: सन्ति |
18. कश्चित् कृषक: बलिवर्दाभ्यां क्षेत्रकर्षणम् कुर्वन्नासित् |
19. दशरथस्य चत्वारः पुत्रा: आसन् |
20. भारतस्य प्रथम राष्ट्रपति: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: आसीत् |
उत्तराणि :-
01. के , 02. कस्मात् , 03. कया , 04. केषाम् ,
05. कानि ,06. का , 07. के , 08. किम् ,
09. केषाम् , 10. कीदृश: , 11. कस्य , 12. कस्य ,
13. क: , 14. केषाम् , 15. कासाम् , 16. कुत्र ,
17. कति , 18. काभ्याम् , 19. कति , 20. क: |
यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत |
01. "भवान् " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया
02. " भवत: " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी
03. " भवति " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) सप्तमी (स) षष्ठी (द) तृतीया
04. " भवताम् " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी (द) तृतीया
05. " भवते " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) चतुर्थी (ब) सप्तमी (स) षष्ठी (द) तृतीया
अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " भवत् " शब्द के शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है |
विभक्ति एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा भवान् भवन्तौ भवन्तः
द्वितीया भवन्तम् भवन्तौ भवत:
तृतीया भवता भवद्भ्याम् भवद्भि:
चतुर्थी भवते भवद्भ्याम् भवद्भ्य:
पञ्चमी भवत: भवद्भ्याम् भवद्भ्य:
षष्ठी भवत: भवतो: भवताम्
सप्तमी भवति भवतो: भवत्सु
संबोधन हे भवन्! हे भवन्तौ! हे भवन्तः!
सामान्यतः बहुव्रीहि समास के पांच भेद होते है :- 01. व्यधिकरण बहुव्रीहि समास 02. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास 03. तुल्य योग्य बहुव्रीहि समास 04. नञ बहुव्रीहि समास 05. उपमानवाचक बहुव्रीहि समास |
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