Tuesday, 13 December 2022

बहुव्रीहि समास परिभाषा व उदाहरण

               बहुव्रीहि समास

जब पूर्व पद और उत्तर पद की प्रधानता न होकर अन्य पद की प्रधानता हो तो उसे बहुव्रीहि समास कहते है | इस समाज में अन्य पद के अनुसार ही बनने वाले पद के लिंग , विभक्ति व वचन निर्धारित होते है |

सामान्यतः बहुव्रीहि समास के पांच भेद होते है :- 01. व्यधिकरण बहुव्रीहि समास 02. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास 03. तुल्य योग्य बहुव्रीहि समास 04. नञ बहुव्रीहि  समास 05. उपमानवाचक बहुव्रीहि समास | 

उदाहरणानि :-

पीतम् अम्बरं यस्य स: = पीताम्बर:                          पवित्रं कर्म यस्य स: = पवित्रकर्म:                            हिमानि एव शिखराणि यस्य स: = हिमशिखर:          गौराणि अंगानि यस्य स: = गौरांग: 


अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदानां समासम् विग्रहं वा विकलपेभ्य: चित्वा लिखित - 


( इन सभी प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है ) 

01. पीतदुग्ध: बालक: प्रसन्न: अस्ति |( Delhi 2011 , 2016 )
 

( अ ) पीतं दुग्धम्          ( ब ) पीतं दुग्धं यया सा 

  ( स ) पीतं दुग्धं येन स:  (द ) पीतं दुग्धं यस्यात् स:


02. बहुफल: वृक्ष: अत्र शोभते | ( Delhi 2011 )
 

 ( अ ) बहूनि फलानि   

 ( ब ) बहूनि फलानि यस्मिन् स: 

 ( स ) बहूनि फलानि स:  

 (द ) बहूनाम्  फलानाम् समाहार:

03. अधितं व्याकरणं येन स: आगच्छति | 

     ( All India 2011 )

( अ ) अधितव्याकरण:   ( ब ) अधितव्याकरणम् 

( स ) अधितव्याकरणा    ( द ) अधितव्याकरण

04.  श्वेताम्बरा अत्र विराजते | ( All India 2011 )

 ( अ ) श्वेता अम्बरा   

 ( ब ) श्वेतम् अम्बरम् यस्य स: 

 ( स ) श्वेतम् अम्बरम्  

 ( द ) श्वेतम् अम्बरम् यस्या: सा

05. प्रतिहतं अंत:करणं यस्य स: प्रच्छनभाग्य: अचिंतयत् | ( All India 2012, 2014, 2016 )

 ( अ ) प्रतिहतमंत: करणम् 

 ( ब ) प्रतिहतकरणम् 

 ( स ) प्रतिहतान्त: करण:  

 ( द ) अन्त: करणप्रतिहतम् 

06. सिद्ध: अर्थ: यस्य स: विराहाय वनम् गच्छत् | ( All India 2012, 2015 )
 

( अ ) सिद्धार्थौ ( ब ) सिद्धार्थ: 

 ( स ) सिद्धार्थस्य ( द ) सिद्धार्था


07. दुष्टा बुद्धि: यस्य स: सद्वचनानि तिरस्कृत्य प्राचलत् | ( Dilhi 2013, 2014 All India 2013 ) 

( अ ) दुष्टबुद्धि:                    ( ब) दुष्टेन बुद्धि: 

( स ) बुद्धिदुष्टा                     ( द ) दृष्टात् बुद्धि:

08. स: बाल्यात् एव नीरक्षीरयो: विवेकं कर्तुम् शीलं यस्य स: आसीत् |( Delhi 2013 )

( अ ) नीरक्षीरविवेक: ( ब ) नीरक्षीरविवेकी 

( स ) नीरक्षीर:           ( द ) नीरक्षीरी

09. ध्यानमग्न: स्थितप्रज्ञ इव तिष्ठामि | ( Delhi 2014 )

( अ )  स्थित: प्रज्ञ: यस्य स: 

( ब )  स्थित: प्रज्ञा: यस्या: सा  

( स ) स्थिता प्रज्ञा यस्य स:   

( द ) प्रज्ञा स्थिता यस्या: सा

10. पीतदुग्धा बालिका विद्यालयं गच्छति |(All India 2014, Dilhi 2015 )

( अ )  पीतं दुग्धं यया सा ( ब ) पीतं दुग्धं येन स: 

( स ) पीतं दुग्धं यस्मिन् स: ( द ) पीतं दुग्धं यस्मै स:

11. दत्तं धनं यस्मै स: जन: आगच्छति | ( Delhi 2015 )
 

( अ ) दत्तधनम्              ( ब ) दत्तधन: 

 ( स ) दत्तधनाय             ( द ) दत्तधनस्य

12. तस्मिन् उद्याने बहुफल: वृक्ष: अस्ति | ( All India 2015 )

 ( अ ) बहूनि फलानि यस्मिन् स: 

 ( ब ) बहूनि च फलानि च 

 ( स ) बहूनि फलानि                 

 ( द ) बहूनि फलानि येषु ते

13. पीताम्बर: हरि: क्षीरसागरे शेते | ( All India 2016 )
 

( अ ) पीतम् अम्बरं यस्य स:  

( ब ) पीतम् अम्बरा यस्य 

( स ) पीतानि अम्बराणि यस्या सा  


उत्तराणि :- 01. स , 02. ब , 03. अ , 04. द , 05. स , 06. ब , 07.  अ , 08. ब , 09. अ , 10. अ , 11. ब , 12. अ , 13. अ |  

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