Saturday, 31 December 2022

विद्या आधारित श्लोक

           विद्या आधारित श्लोक 

संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हिन्दी अनुवाद सहित उल्लेख यहां किया गया है  ।

श्लोक :- 01


विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तम् धनम् , 
विद्याभोगकरी यश: सुखकरी विद्या गुरूणाम् गुरु | 
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता '
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्या- विहीन: पशु: ।।

यहां क्लिक करें  विडियो में कुछ अलग मिलेगा 


हिंदी अर्थ : - विद्या मनुष्य की सुंदरता है , यह अत्यंत छुपा हुआ धन है | विद्या उपभोग का साधन , यश और सुख उपलब्ध कराने वाली है , विद्या गुरुओं की गुरू है | अन्य प्रदेश जाने पर विद्या भाई की तरह साथ देती है , विद्या सबसे बड़ी देवता है | राजमहलों में विद्या की ही पूजा की जाती है धन की नहीं , विद्या से रहित व्यक्ति पशु के समान होता है | 


श्लोक :- 02. 


विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रय: , 
धेनु: कामदुघा रतिश्च विरहे नेत्रं तृतीयं च सा | 
सत्कारायतनं कुलस्य महिमा रत्नैर्विना भूषणम् , 
तस्मादन्यमुपेक्ष्य सर्वविषयं विद्याधिकारं कुरु ||   


हिंदी अर्थ :- विद्या मनुष्य का यश है , अच्छे दिन बीत जाने पर सहारा है , विद्या इच्छानुसार फल देने वाली कामधेनु गाय के समान है , विद्या रति और विरह के समय तीसरा नेत्र है | विद्या परिवार का सम्मान बढ़ाने वाली होती है , विद्या, बिना रत्नों का आभूषण है इसलिए सबकी उपेक्षा करके विद्या पर ही अधिकार करना चाहिए | 


श्लोक :- 03. 


येषां न विद्या न तपो न दानं , 
  ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्म: |
ते मर्त्यलोके भुवीभारभूता  , 
  मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति || 


हिंदी अर्थ :- जिन व्यक्तियों के पास विद्या , तप , दान , ज्ञान , शिष्टाचार , गुण और धर्म (कर्तव्य) नही है | ऐसे व्यक्ति इस संसार में और पृथ्वी पर भाररूपी होते हुए मनुष्य के रूप में जानवर की तरह विचरण करते है | 


श्लोक :- 04. 


न चौराहार्यं न च राजहार्यं , 
     न भ्रातृभाज्यम् न च भारकारि | 
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं , 
     विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्  || 


हिंदी अर्थ :- विद्या रूपी धन अन्य सभी धनों में से प्रधान है क्योंकि इसे न तो चोर चुरा सकता है , न ही राजा छीन सकता है , न ही भाइयों में बांटा जा सकता है और न ही  विद्या अत्यधिक भार बढ़ाने वाली है |  विद्या को जितनी हम खर्च करेंगे उतनी ही इसमें वृद्धि होती है |  

Tuesday, 27 December 2022

प्रश्न निर्माण

      प्रश्न निर्माण से संबंधित प्रश्न 

प्रश्न निर्माण करना बहुत ही सरल है | सिर्फ हमे शब्द रूप का ज्ञान होना आवश्यक है , जिसमें अकारान्त ( पुलिङ्ग ) , आकारान्त ( स्त्रीलिंग ) , ईकारांत (स्त्रीलिंग ) , और नपुंसकलिंग शब्द रूप शामिल है |
प्रश्न निर्माण किम् शब्द के शब्द रूप से होता है अतः हमें किम् शब्द के शब्द रूप याद होना बहुत ही आवश्यक है  |
यदि स्थान वाचक शब्द हो तो " कुत्र " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |
यदि संख्या वाचक शब्द हो तो " कति " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है -

रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्न निर्माणं कुरुत -

01. वसन्ते सरसा: रसाला: लसन्ति |
02. सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता |
03. लुब्धया बालिकया लुब्धस्य फलं प्राप्तम् |
04. खलानाम् मैत्री आरम्भगुर्वी भवति |
05. मोदकानि पूजानिमित्तानि रचितानि आसन् |
06. जन्तो: मूढ़ता निद्रा भवति |
07. सज्जना: एव शशिकिरणसमा: भवन्ति |
(CBSE 2011)

08. गुरुवचनम् उपादेयं भवति | ( CBSE 2011 )
09. प्राणिनाम् मूढ़ता निद्रा कथिता|(CBSE 2011)
10. साधुजनमैत्री सुखदा भवति | (CBSE 2012 )
11. विनितस्य जनस्य वशे प्राणिगण:|(CBSE 2012) 

इन से संबंधित विडियो के लिए यहां क्लिक करें


12. लोके चक्षुष: दानं दुष्करं अस्ति |(CBSE 2014)
13. अनृतं वदसि चेत् काक: दशेत् |(CBSE 2014)
14. सर्वेषाम् एव महत्त्वं विद्यते | ( CBSE 2015 )
15. मम पिच्छानाम्  अपूर्वं सौन्दर्यम्|(CBSE 2016)
16. छात्रा: उद्याने क्रीडन्ति |
17. अस्माकं विद्यालये एक सहस्र पञ्च शतं छात्रा: सन्ति |
18. कश्चित् कृषक: बलिवर्दाभ्यां क्षेत्रकर्षणम् कुर्वन्नासित् |
19. दशरथस्य चत्वारः पुत्रा: आसन् |
20. भारतस्य प्रथम राष्ट्रपति: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: आसीत् |

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उत्तराणि :-
01. के , 02. कस्मात्  , 03. कया , 04. केषाम्  , 

05. कानि ,06. का , 07. के , 08. किम् , 

09. केषाम् , 10. कीदृश: , 11. कस्य , 12. कस्य , 

13. क: , 14. केषाम् , 15. कासाम् , 16. कुत्र , 

17. कति , 18. काभ्याम् , 19. कति , 20. क: |

Saturday, 24 December 2022

भवत् शब्द रूप (पुल्लिंग) || bhavat shabd roop pulling ||

    भवत्  ( पुल्लिंग ) शब्द रूप 


यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत | 

01. "भवान् " अत्र का विभक्ति: ? 

 (अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया 

02. " भवत: " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी 

03.  " भवति " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) प्रथमा (ब) सप्तमी (स) षष्ठी  (द) तृतीया

04. " भवताम् " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी  (द) तृतीया 

05. " भवते "  अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) चतुर्थी  (ब) सप्तमी  (स) षष्ठी  (द) तृतीया 


अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " भवत् " शब्द के शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है | 

विभक्ति     एकवचनम्    द्विवचनम्    बहुवचनम् 

प्रथमा        भवान्           भवन्तौ        भवन्तः 

द्वितीया      भवन्तम्        भवन्तौ         भवत:

तृतीया       भवता            भवद्भ्याम्    भवद्भि: 

चतुर्थी        भवते             भवद्भ्याम्    भवद्भ्य: 

पञ्चमी      भवत:           भवद्भ्याम्    भवद्भ्य:

षष्ठी          भवत:           भवतो:        भवताम्

सप्तमी      भवति             भवतो:        भवत्सु

संबोधन     हे भवन्!       हे भवन्तौ!    हे भवन्तः!

Tuesday, 13 December 2022

बहुव्रीहि समास परिभाषा व उदाहरण

               बहुव्रीहि समास

जब पूर्व पद और उत्तर पद की प्रधानता न होकर अन्य पद की प्रधानता हो तो उसे बहुव्रीहि समास कहते है | इस समाज में अन्य पद के अनुसार ही बनने वाले पद के लिंग , विभक्ति व वचन निर्धारित होते है |

सामान्यतः बहुव्रीहि समास के पांच भेद होते है :- 01. व्यधिकरण बहुव्रीहि समास 02. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास 03. तुल्य योग्य बहुव्रीहि समास 04. नञ बहुव्रीहि  समास 05. उपमानवाचक बहुव्रीहि समास | 

उदाहरणानि :-

पीतम् अम्बरं यस्य स: = पीताम्बर:                          पवित्रं कर्म यस्य स: = पवित्रकर्म:                            हिमानि एव शिखराणि यस्य स: = हिमशिखर:          गौराणि अंगानि यस्य स: = गौरांग: 


अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदानां समासम् विग्रहं वा विकलपेभ्य: चित्वा लिखित - 


( इन सभी प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है ) 

01. पीतदुग्ध: बालक: प्रसन्न: अस्ति |( Delhi 2011 , 2016 )
 

( अ ) पीतं दुग्धम्          ( ब ) पीतं दुग्धं यया सा 

  ( स ) पीतं दुग्धं येन स:  (द ) पीतं दुग्धं यस्यात् स:


02. बहुफल: वृक्ष: अत्र शोभते | ( Delhi 2011 )
 

 ( अ ) बहूनि फलानि   

 ( ब ) बहूनि फलानि यस्मिन् स: 

 ( स ) बहूनि फलानि स:  

 (द ) बहूनाम्  फलानाम् समाहार:

03. अधितं व्याकरणं येन स: आगच्छति | 

     ( All India 2011 )

( अ ) अधितव्याकरण:   ( ब ) अधितव्याकरणम् 

( स ) अधितव्याकरणा    ( द ) अधितव्याकरण

04.  श्वेताम्बरा अत्र विराजते | ( All India 2011 )

 ( अ ) श्वेता अम्बरा   

 ( ब ) श्वेतम् अम्बरम् यस्य स: 

 ( स ) श्वेतम् अम्बरम्  

 ( द ) श्वेतम् अम्बरम् यस्या: सा

05. प्रतिहतं अंत:करणं यस्य स: प्रच्छनभाग्य: अचिंतयत् | ( All India 2012, 2014, 2016 )

 ( अ ) प्रतिहतमंत: करणम् 

 ( ब ) प्रतिहतकरणम् 

 ( स ) प्रतिहतान्त: करण:  

 ( द ) अन्त: करणप्रतिहतम् 

06. सिद्ध: अर्थ: यस्य स: विराहाय वनम् गच्छत् | ( All India 2012, 2015 )
 

( अ ) सिद्धार्थौ ( ब ) सिद्धार्थ: 

 ( स ) सिद्धार्थस्य ( द ) सिद्धार्था


07. दुष्टा बुद्धि: यस्य स: सद्वचनानि तिरस्कृत्य प्राचलत् | ( Dilhi 2013, 2014 All India 2013 ) 

( अ ) दुष्टबुद्धि:                    ( ब) दुष्टेन बुद्धि: 

( स ) बुद्धिदुष्टा                     ( द ) दृष्टात् बुद्धि:

08. स: बाल्यात् एव नीरक्षीरयो: विवेकं कर्तुम् शीलं यस्य स: आसीत् |( Delhi 2013 )

( अ ) नीरक्षीरविवेक: ( ब ) नीरक्षीरविवेकी 

( स ) नीरक्षीर:           ( द ) नीरक्षीरी

09. ध्यानमग्न: स्थितप्रज्ञ इव तिष्ठामि | ( Delhi 2014 )

( अ )  स्थित: प्रज्ञ: यस्य स: 

( ब )  स्थित: प्रज्ञा: यस्या: सा  

( स ) स्थिता प्रज्ञा यस्य स:   

( द ) प्रज्ञा स्थिता यस्या: सा

10. पीतदुग्धा बालिका विद्यालयं गच्छति |(All India 2014, Dilhi 2015 )

( अ )  पीतं दुग्धं यया सा ( ब ) पीतं दुग्धं येन स: 

( स ) पीतं दुग्धं यस्मिन् स: ( द ) पीतं दुग्धं यस्मै स:

11. दत्तं धनं यस्मै स: जन: आगच्छति | ( Delhi 2015 )
 

( अ ) दत्तधनम्              ( ब ) दत्तधन: 

 ( स ) दत्तधनाय             ( द ) दत्तधनस्य

12. तस्मिन् उद्याने बहुफल: वृक्ष: अस्ति | ( All India 2015 )

 ( अ ) बहूनि फलानि यस्मिन् स: 

 ( ब ) बहूनि च फलानि च 

 ( स ) बहूनि फलानि                 

 ( द ) बहूनि फलानि येषु ते

13. पीताम्बर: हरि: क्षीरसागरे शेते | ( All India 2016 )
 

( अ ) पीतम् अम्बरं यस्य स:  

( ब ) पीतम् अम्बरा यस्य 

( स ) पीतानि अम्बराणि यस्या सा  


उत्तराणि :- 01. स , 02. ब , 03. अ , 04. द , 05. स , 06. ब , 07.  अ , 08. ब , 09. अ , 10. अ , 11. ब , 12. अ , 13. अ |  

Friday, 9 December 2022

रुत्व ( रत्व ) सन्धि की परिभाषा व उदाहरण // उत्व सन्धि की परिभाषा और उदाहरण

            विसर्ग संधि: 

                       विसर्ग संधि: 
                            |
....................................................
|                |                |                       | 
उत्व    रुत्व (रत्व)   विसर्गस्य लोप:     सत्व    

 
01. उत्व सन्धि: :- ( i ) अतो रोरप्लुतादप्लुते :- यदि विसर्ग से पहले " अ " हो और विसर्ग के बाद " अ " हो तो विसर्ग को " उ " आदेश हो जाता है एवं प्रथम " अ " और " उ " मिलकर " ओ " हो जाता है | तथा विसर्ग के बाद वाले " अ " को अवग्रह ( S ) हो जाता है | 
( ii ) हशि च :-  यदि विसर्ग से पहले " अ " हो और विसर्ग के बाद किसी भी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व  हो तो विसर्ग को "उ " आदेश हो जाता है तथा प्रथम " अ " और " उ " मिलकर "ओ " हो जाता है | 


01. अ + : + अ = अ + उ + अ = ओS 

02. अ + : + वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व  = अ + उ + वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व = ओ 

उदहरणानि :- ( यहाँ पर " S " जो है इसे अवग्रह कहते है इसकी Sound " अ " की ही होती है |  


उत्व सन्धि को विडियो द्वारा समझने के लिए यहां क्लिक करें 

प्रथम: + अध्याय = प्रथमोSध्याय: 
मन: + अस्ति  = मनोSस्ति 
श्याम: + अपि = श्यामोSपि 
देव: + अधुना  = देवोSधुना 
स: + अहम्     = सोSहम् 
क: + अपि      = कोSपि 
शिव: + वन्द्य   = शिवोवंद्य:  
मन: + रथ       = मनोरथ: 
मन: + हर:      = मनोहर: 
यश: + गानम्  = यशोगानम् 
देव: + गच्छति = देवोगच्छति 
राम: + हसति  = रामोहसति 
रज: + गुण:    = रजोगुण:  


 क्लिक करके एक बार इस विडियो को जरूर देखें ।

( 02 ) रुत्व ( रत्व सन्धि ) :- यदि विसर्ग से पहले अ , आ से भिन्न स्वर हो तथा विसर्ग के बाद किसी भी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व  हो तो विसर्ग को " र् " आदेश हो जाता है | 
उदाहरणानि :- 
नि: + बल:     = निर्बल: 
मुनि: + अयम् = मुनिरयम् 
पितु: + इच्छा  = पितुरिच्छा 
वधू: + इव      = वधूरिव 
गुरु: + भवति  = गुरुर्भवति 
पितु: + आज्ञा = पितुराज्ञा 
रवि: + उदेति  = रविरुदेति 
चक्षु: + दानम् = चक्षुर्दानम् 


Friday, 2 December 2022

अस्मद् ( सर्वनाम शब्द )

 अस्मद् ( मैं ) सर्वनाम शब्द 

यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत | 
01. " अस्मत् " अत्र का विभक्ति: ? 

(अ) चतुर्थी  (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया                                                  

02. " मयि " अत्र का विभक्ति: ? 

 (अ) सप्तमी (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी                                                  

03.  " अस्मभ्यम् " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) चतुर्थी  (ब) पञ्चमी (स) तृतीया  (द) न कोsपि                                              

 04. " अस्मद्  " इत्यस्य तृतीया एकवचनम् किम् भवति ?

   (अ) माम्  (ब)  मह्यम्  (स) मया  (द) मम                                                            

05.  " अस्मद् " इत्यस्य षष्ठी द्विवचनम् किम् भवति ? 

 (अ) आवाम्  (ब) आवाभ्याम् (स) आवयो:  (द) मम  

Youtube channel पर अशुद्धि संशोधन प्रश्न पत्र के लिए क्लिक करें 
अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " अस्मद् " ( सर्वनाम शब्द ) शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है | 

विभक्ति  एकवचनम्    द्विवचनम्      बहुवचनम् 

प्रथमा      अहम्            आवाम्           वयम् 


द्वितीया    माम्                "   "            अस्मान्

तृतीया     मया               आवाभ्याम्     अस्माभि: 

चतुर्थी      मह्यम्              "      "         अस्मभ्यम्

पञ्चमी    मत्                  "      "         अस्मत् 

षष्ठी         मम                आवयो:          अस्माकम् 

सप्तमी     मयि                "      "          अस्मासु 

विद्या आधारित श्लोक

            विद्या आधारित श्लोक   संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हि...