मतुप् प्रत्यय
इस प्रत्यय का प्रयोग भाववाचक संज्ञा और विशेषण के रूप में किया जाता है | मतुप् प्रत्यय में अंतिम " उप् " का लोप होकर " मत् " शेष रहता है | यदि शब्दान्त ( शब्द के अंत में ) अ / आ / स् हो तो " मत् " को " वत् " हो जाता है | इस प्रत्यय के रूप तीनो लिंगो में चलते हैं :- पुल्लिंग , स्त्रीलिंग , नपुंसकलिंग ( भवत् शब्द के अनुसार ) |
शब्द प्रत्यय पुल्लिंग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंग
अर्थ मतुप् अर्थवान् अर्थवती अर्थवत्
बल ,, ,, बलवान् बलवती बलवत्
गुण ,, ,, गुणवान् गुणवती गुणवत्
रूप ,, ,, रूपवान् रूपवती रूपवत्
ज्ञान ,, ,, ज्ञानवान् ज्ञानवती ज्ञानवत्
प्राण ,, ,, प्राणवान् प्राणवती प्राणवत्
श्री ,, ,, श्रीमान् श्रीमती श्रीमत्
धी ,, ,, धीमान् धीमती धीमत्
शक्ति ,, ,, शक्तिमान् शक्तिमती शक्तिमत्
आयुस् ,, ,, आयुष्मान् आयुष्मती आयुष्मत्
धन ,, ,, धनवान् धनवती धनवत्
गो ,, ,, गोमान् गोमती गोमत्
विचार ,, ,, विचारवान् विचारवती विचारवत्
फल ,, ,, फलवान् फलवती फलवत्
तड़ित् ,, ,, तड़ित्वान् तड़ित्वती तड़ित्वत्
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