Monday, 19 September 2022

Translation Hindi to Sanskrit // अनुवाद हिंदी से संस्कृत //

                हिंदी से संस्कृत में अनुवाद 

संस्कृत में अनुवाद करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है | 

1. कर्ता के अनुसार ही क्रिया में परिवर्तन होता है |

    The verb changes according to the subject .

2. पुरुष और वचन के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है |

   There is a change in the verb according to the person and the       number .

3. संस्कृत में अनुवाद करने के लिए कारक चिह्नों का ज्ञान होना अत्यावश्यक है | कारक      चिह्नों के अनुसार ही विभक्ति में  परिवर्तन होता है |

              अनुवाद का विडियो देखने के लिए यहां क्लिक करे :-                        कारक और कारक चिह्न :-  

   विभक्ति           कारक          कारक चिह्न 

 प्रथमा                 कर्ता              ने 

 द्वितीया               कर्म               को 

 तृतीया                करण              से , के द्वारा  

चतुर्थी                 सम्प्रदान          के लिए   

पंचमी                 अपादान        से ( अलग होने के अर्थ में ) 

षष्ठी                सम्बन्ध         का , के , की , रा , रे , री    

सप्तमी             अधिकरण          में , पे , पर 

                       सम्बोधन           हे , अरे 


इन चिह्नों को ध्यानपूर्वक देखने पर ज्ञात होता है कि " से " का प्रयोग दो स्थानों पर हुआ है :- 1. तृतीया और 2. पंचमी विभक्ति में | यहाँ पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है कि तृतीया विभक्ति में " से " का प्रयोग एक साधन के रूप में किया जाता है जैसे :- मैं कलम से लिखता हूं | यहां पर कलम लिखने का साधन है |

          पेड़ से पत्ता गिरता है | यहां पर पत्ता पेड़ से अलग हो गया अर्थात पंचमी में " से " का प्रयोग अलग होने के अर्थ में किया जाता है |  


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