हिंदी से संस्कृत में अनुवाद
संस्कृत में अनुवाद करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है |
1. कर्ता के अनुसार ही क्रिया में परिवर्तन होता है |
The verb changes according to the subject .
2. पुरुष और वचन के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है |
There is a change in the verb according to the person and the number .
3. संस्कृत में अनुवाद करने के लिए कारक चिह्नों का ज्ञान होना अत्यावश्यक है | कारक चिह्नों के अनुसार ही विभक्ति में परिवर्तन होता है |
अनुवाद का विडियो देखने के लिए यहां क्लिक करे :- कारक और कारक चिह्न :-
विभक्ति कारक कारक चिह्न
प्रथमा कर्ता ने
द्वितीया कर्म को
तृतीया करण से , के द्वारा
चतुर्थी सम्प्रदान के लिए
पंचमी अपादान से ( अलग होने के अर्थ में )
षष्ठी सम्बन्ध का , के , की , रा , रे , री
सप्तमी अधिकरण में , पे , पर
सम्बोधन हे , अरे
इन चिह्नों को ध्यानपूर्वक देखने पर ज्ञात होता है कि " से " का प्रयोग दो स्थानों पर हुआ है :- 1. तृतीया और 2. पंचमी विभक्ति में | यहाँ पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है कि तृतीया विभक्ति में " से " का प्रयोग एक साधन के रूप में किया जाता है जैसे :- मैं कलम से लिखता हूं | यहां पर कलम लिखने का साधन है |
पेड़ से पत्ता गिरता है | यहां पर पत्ता पेड़ से अलग हो गया अर्थात पंचमी में " से " का प्रयोग अलग होने के अर्थ में किया जाता है |
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