Saturday, 31 December 2022

विद्या आधारित श्लोक

           विद्या आधारित श्लोक 

संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हिन्दी अनुवाद सहित उल्लेख यहां किया गया है  ।

श्लोक :- 01


विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तम् धनम् , 
विद्याभोगकरी यश: सुखकरी विद्या गुरूणाम् गुरु | 
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता '
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्या- विहीन: पशु: ।।

यहां क्लिक करें  विडियो में कुछ अलग मिलेगा 


हिंदी अर्थ : - विद्या मनुष्य की सुंदरता है , यह अत्यंत छुपा हुआ धन है | विद्या उपभोग का साधन , यश और सुख उपलब्ध कराने वाली है , विद्या गुरुओं की गुरू है | अन्य प्रदेश जाने पर विद्या भाई की तरह साथ देती है , विद्या सबसे बड़ी देवता है | राजमहलों में विद्या की ही पूजा की जाती है धन की नहीं , विद्या से रहित व्यक्ति पशु के समान होता है | 


श्लोक :- 02. 


विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रय: , 
धेनु: कामदुघा रतिश्च विरहे नेत्रं तृतीयं च सा | 
सत्कारायतनं कुलस्य महिमा रत्नैर्विना भूषणम् , 
तस्मादन्यमुपेक्ष्य सर्वविषयं विद्याधिकारं कुरु ||   


हिंदी अर्थ :- विद्या मनुष्य का यश है , अच्छे दिन बीत जाने पर सहारा है , विद्या इच्छानुसार फल देने वाली कामधेनु गाय के समान है , विद्या रति और विरह के समय तीसरा नेत्र है | विद्या परिवार का सम्मान बढ़ाने वाली होती है , विद्या, बिना रत्नों का आभूषण है इसलिए सबकी उपेक्षा करके विद्या पर ही अधिकार करना चाहिए | 


श्लोक :- 03. 


येषां न विद्या न तपो न दानं , 
  ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्म: |
ते मर्त्यलोके भुवीभारभूता  , 
  मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति || 


हिंदी अर्थ :- जिन व्यक्तियों के पास विद्या , तप , दान , ज्ञान , शिष्टाचार , गुण और धर्म (कर्तव्य) नही है | ऐसे व्यक्ति इस संसार में और पृथ्वी पर भाररूपी होते हुए मनुष्य के रूप में जानवर की तरह विचरण करते है | 


श्लोक :- 04. 


न चौराहार्यं न च राजहार्यं , 
     न भ्रातृभाज्यम् न च भारकारि | 
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं , 
     विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्  || 


हिंदी अर्थ :- विद्या रूपी धन अन्य सभी धनों में से प्रधान है क्योंकि इसे न तो चोर चुरा सकता है , न ही राजा छीन सकता है , न ही भाइयों में बांटा जा सकता है और न ही  विद्या अत्यधिक भार बढ़ाने वाली है |  विद्या को जितनी हम खर्च करेंगे उतनी ही इसमें वृद्धि होती है |  

Tuesday, 27 December 2022

प्रश्न निर्माण

      प्रश्न निर्माण से संबंधित प्रश्न 

प्रश्न निर्माण करना बहुत ही सरल है | सिर्फ हमे शब्द रूप का ज्ञान होना आवश्यक है , जिसमें अकारान्त ( पुलिङ्ग ) , आकारान्त ( स्त्रीलिंग ) , ईकारांत (स्त्रीलिंग ) , और नपुंसकलिंग शब्द रूप शामिल है |
प्रश्न निर्माण किम् शब्द के शब्द रूप से होता है अतः हमें किम् शब्द के शब्द रूप याद होना बहुत ही आवश्यक है  |
यदि स्थान वाचक शब्द हो तो " कुत्र " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |
यदि संख्या वाचक शब्द हो तो " कति " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है -

रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्न निर्माणं कुरुत -

01. वसन्ते सरसा: रसाला: लसन्ति |
02. सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता |
03. लुब्धया बालिकया लुब्धस्य फलं प्राप्तम् |
04. खलानाम् मैत्री आरम्भगुर्वी भवति |
05. मोदकानि पूजानिमित्तानि रचितानि आसन् |
06. जन्तो: मूढ़ता निद्रा भवति |
07. सज्जना: एव शशिकिरणसमा: भवन्ति |
(CBSE 2011)

08. गुरुवचनम् उपादेयं भवति | ( CBSE 2011 )
09. प्राणिनाम् मूढ़ता निद्रा कथिता|(CBSE 2011)
10. साधुजनमैत्री सुखदा भवति | (CBSE 2012 )
11. विनितस्य जनस्य वशे प्राणिगण:|(CBSE 2012) 

इन से संबंधित विडियो के लिए यहां क्लिक करें


12. लोके चक्षुष: दानं दुष्करं अस्ति |(CBSE 2014)
13. अनृतं वदसि चेत् काक: दशेत् |(CBSE 2014)
14. सर्वेषाम् एव महत्त्वं विद्यते | ( CBSE 2015 )
15. मम पिच्छानाम्  अपूर्वं सौन्दर्यम्|(CBSE 2016)
16. छात्रा: उद्याने क्रीडन्ति |
17. अस्माकं विद्यालये एक सहस्र पञ्च शतं छात्रा: सन्ति |
18. कश्चित् कृषक: बलिवर्दाभ्यां क्षेत्रकर्षणम् कुर्वन्नासित् |
19. दशरथस्य चत्वारः पुत्रा: आसन् |
20. भारतस्य प्रथम राष्ट्रपति: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: आसीत् |

Click here


उत्तराणि :-
01. के , 02. कस्मात्  , 03. कया , 04. केषाम्  , 

05. कानि ,06. का , 07. के , 08. किम् , 

09. केषाम् , 10. कीदृश: , 11. कस्य , 12. कस्य , 

13. क: , 14. केषाम् , 15. कासाम् , 16. कुत्र , 

17. कति , 18. काभ्याम् , 19. कति , 20. क: |

Saturday, 24 December 2022

भवत् शब्द रूप (पुल्लिंग) || bhavat shabd roop pulling ||

    भवत्  ( पुल्लिंग ) शब्द रूप 


यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत | 

01. "भवान् " अत्र का विभक्ति: ? 

 (अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया 

02. " भवत: " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी 

03.  " भवति " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) प्रथमा (ब) सप्तमी (स) षष्ठी  (द) तृतीया

04. " भवताम् " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी  (द) तृतीया 

05. " भवते "  अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) चतुर्थी  (ब) सप्तमी  (स) षष्ठी  (द) तृतीया 


अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " भवत् " शब्द के शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है | 

विभक्ति     एकवचनम्    द्विवचनम्    बहुवचनम् 

प्रथमा        भवान्           भवन्तौ        भवन्तः 

द्वितीया      भवन्तम्        भवन्तौ         भवत:

तृतीया       भवता            भवद्भ्याम्    भवद्भि: 

चतुर्थी        भवते             भवद्भ्याम्    भवद्भ्य: 

पञ्चमी      भवत:           भवद्भ्याम्    भवद्भ्य:

षष्ठी          भवत:           भवतो:        भवताम्

सप्तमी      भवति             भवतो:        भवत्सु

संबोधन     हे भवन्!       हे भवन्तौ!    हे भवन्तः!

Tuesday, 13 December 2022

बहुव्रीहि समास परिभाषा व उदाहरण

               बहुव्रीहि समास

जब पूर्व पद और उत्तर पद की प्रधानता न होकर अन्य पद की प्रधानता हो तो उसे बहुव्रीहि समास कहते है | इस समाज में अन्य पद के अनुसार ही बनने वाले पद के लिंग , विभक्ति व वचन निर्धारित होते है |

सामान्यतः बहुव्रीहि समास के पांच भेद होते है :- 01. व्यधिकरण बहुव्रीहि समास 02. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास 03. तुल्य योग्य बहुव्रीहि समास 04. नञ बहुव्रीहि  समास 05. उपमानवाचक बहुव्रीहि समास | 

उदाहरणानि :-

पीतम् अम्बरं यस्य स: = पीताम्बर:                          पवित्रं कर्म यस्य स: = पवित्रकर्म:                            हिमानि एव शिखराणि यस्य स: = हिमशिखर:          गौराणि अंगानि यस्य स: = गौरांग: 


अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदानां समासम् विग्रहं वा विकलपेभ्य: चित्वा लिखित - 


( इन सभी प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है ) 

01. पीतदुग्ध: बालक: प्रसन्न: अस्ति |( Delhi 2011 , 2016 )
 

( अ ) पीतं दुग्धम्          ( ब ) पीतं दुग्धं यया सा 

  ( स ) पीतं दुग्धं येन स:  (द ) पीतं दुग्धं यस्यात् स:


02. बहुफल: वृक्ष: अत्र शोभते | ( Delhi 2011 )
 

 ( अ ) बहूनि फलानि   

 ( ब ) बहूनि फलानि यस्मिन् स: 

 ( स ) बहूनि फलानि स:  

 (द ) बहूनाम्  फलानाम् समाहार:

03. अधितं व्याकरणं येन स: आगच्छति | 

     ( All India 2011 )

( अ ) अधितव्याकरण:   ( ब ) अधितव्याकरणम् 

( स ) अधितव्याकरणा    ( द ) अधितव्याकरण

04.  श्वेताम्बरा अत्र विराजते | ( All India 2011 )

 ( अ ) श्वेता अम्बरा   

 ( ब ) श्वेतम् अम्बरम् यस्य स: 

 ( स ) श्वेतम् अम्बरम्  

 ( द ) श्वेतम् अम्बरम् यस्या: सा

05. प्रतिहतं अंत:करणं यस्य स: प्रच्छनभाग्य: अचिंतयत् | ( All India 2012, 2014, 2016 )

 ( अ ) प्रतिहतमंत: करणम् 

 ( ब ) प्रतिहतकरणम् 

 ( स ) प्रतिहतान्त: करण:  

 ( द ) अन्त: करणप्रतिहतम् 

06. सिद्ध: अर्थ: यस्य स: विराहाय वनम् गच्छत् | ( All India 2012, 2015 )
 

( अ ) सिद्धार्थौ ( ब ) सिद्धार्थ: 

 ( स ) सिद्धार्थस्य ( द ) सिद्धार्था


07. दुष्टा बुद्धि: यस्य स: सद्वचनानि तिरस्कृत्य प्राचलत् | ( Dilhi 2013, 2014 All India 2013 ) 

( अ ) दुष्टबुद्धि:                    ( ब) दुष्टेन बुद्धि: 

( स ) बुद्धिदुष्टा                     ( द ) दृष्टात् बुद्धि:

08. स: बाल्यात् एव नीरक्षीरयो: विवेकं कर्तुम् शीलं यस्य स: आसीत् |( Delhi 2013 )

( अ ) नीरक्षीरविवेक: ( ब ) नीरक्षीरविवेकी 

( स ) नीरक्षीर:           ( द ) नीरक्षीरी

09. ध्यानमग्न: स्थितप्रज्ञ इव तिष्ठामि | ( Delhi 2014 )

( अ )  स्थित: प्रज्ञ: यस्य स: 

( ब )  स्थित: प्रज्ञा: यस्या: सा  

( स ) स्थिता प्रज्ञा यस्य स:   

( द ) प्रज्ञा स्थिता यस्या: सा

10. पीतदुग्धा बालिका विद्यालयं गच्छति |(All India 2014, Dilhi 2015 )

( अ )  पीतं दुग्धं यया सा ( ब ) पीतं दुग्धं येन स: 

( स ) पीतं दुग्धं यस्मिन् स: ( द ) पीतं दुग्धं यस्मै स:

11. दत्तं धनं यस्मै स: जन: आगच्छति | ( Delhi 2015 )
 

( अ ) दत्तधनम्              ( ब ) दत्तधन: 

 ( स ) दत्तधनाय             ( द ) दत्तधनस्य

12. तस्मिन् उद्याने बहुफल: वृक्ष: अस्ति | ( All India 2015 )

 ( अ ) बहूनि फलानि यस्मिन् स: 

 ( ब ) बहूनि च फलानि च 

 ( स ) बहूनि फलानि                 

 ( द ) बहूनि फलानि येषु ते

13. पीताम्बर: हरि: क्षीरसागरे शेते | ( All India 2016 )
 

( अ ) पीतम् अम्बरं यस्य स:  

( ब ) पीतम् अम्बरा यस्य 

( स ) पीतानि अम्बराणि यस्या सा  


उत्तराणि :- 01. स , 02. ब , 03. अ , 04. द , 05. स , 06. ब , 07.  अ , 08. ब , 09. अ , 10. अ , 11. ब , 12. अ , 13. अ |  

Friday, 9 December 2022

रुत्व ( रत्व ) सन्धि की परिभाषा व उदाहरण // उत्व सन्धि की परिभाषा और उदाहरण

            विसर्ग संधि: 

                       विसर्ग संधि: 
                            |
....................................................
|                |                |                       | 
उत्व    रुत्व (रत्व)   विसर्गस्य लोप:     सत्व    

 
01. उत्व सन्धि: :- ( i ) अतो रोरप्लुतादप्लुते :- यदि विसर्ग से पहले " अ " हो और विसर्ग के बाद " अ " हो तो विसर्ग को " उ " आदेश हो जाता है एवं प्रथम " अ " और " उ " मिलकर " ओ " हो जाता है | तथा विसर्ग के बाद वाले " अ " को अवग्रह ( S ) हो जाता है | 
( ii ) हशि च :-  यदि विसर्ग से पहले " अ " हो और विसर्ग के बाद किसी भी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व  हो तो विसर्ग को "उ " आदेश हो जाता है तथा प्रथम " अ " और " उ " मिलकर "ओ " हो जाता है | 


01. अ + : + अ = अ + उ + अ = ओS 

02. अ + : + वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व  = अ + उ + वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व = ओ 

उदहरणानि :- ( यहाँ पर " S " जो है इसे अवग्रह कहते है इसकी Sound " अ " की ही होती है |  


उत्व सन्धि को विडियो द्वारा समझने के लिए यहां क्लिक करें 

प्रथम: + अध्याय = प्रथमोSध्याय: 
मन: + अस्ति  = मनोSस्ति 
श्याम: + अपि = श्यामोSपि 
देव: + अधुना  = देवोSधुना 
स: + अहम्     = सोSहम् 
क: + अपि      = कोSपि 
शिव: + वन्द्य   = शिवोवंद्य:  
मन: + रथ       = मनोरथ: 
मन: + हर:      = मनोहर: 
यश: + गानम्  = यशोगानम् 
देव: + गच्छति = देवोगच्छति 
राम: + हसति  = रामोहसति 
रज: + गुण:    = रजोगुण:  


 क्लिक करके एक बार इस विडियो को जरूर देखें ।

( 02 ) रुत्व ( रत्व सन्धि ) :- यदि विसर्ग से पहले अ , आ से भिन्न स्वर हो तथा विसर्ग के बाद किसी भी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अथवा य , र , ल , व  हो तो विसर्ग को " र् " आदेश हो जाता है | 
उदाहरणानि :- 
नि: + बल:     = निर्बल: 
मुनि: + अयम् = मुनिरयम् 
पितु: + इच्छा  = पितुरिच्छा 
वधू: + इव      = वधूरिव 
गुरु: + भवति  = गुरुर्भवति 
पितु: + आज्ञा = पितुराज्ञा 
रवि: + उदेति  = रविरुदेति 
चक्षु: + दानम् = चक्षुर्दानम् 


Friday, 2 December 2022

अस्मद् ( सर्वनाम शब्द )

 अस्मद् ( मैं ) सर्वनाम शब्द 

यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत | 
01. " अस्मत् " अत्र का विभक्ति: ? 

(अ) चतुर्थी  (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया                                                  

02. " मयि " अत्र का विभक्ति: ? 

 (अ) सप्तमी (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी                                                  

03.  " अस्मभ्यम् " अत्र का विभक्ति: ?

 (अ) चतुर्थी  (ब) पञ्चमी (स) तृतीया  (द) न कोsपि                                              

 04. " अस्मद्  " इत्यस्य तृतीया एकवचनम् किम् भवति ?

   (अ) माम्  (ब)  मह्यम्  (स) मया  (द) मम                                                            

05.  " अस्मद् " इत्यस्य षष्ठी द्विवचनम् किम् भवति ? 

 (अ) आवाम्  (ब) आवाभ्याम् (स) आवयो:  (द) मम  

Youtube channel पर अशुद्धि संशोधन प्रश्न पत्र के लिए क्लिक करें 
अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " अस्मद् " ( सर्वनाम शब्द ) शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है | 

विभक्ति  एकवचनम्    द्विवचनम्      बहुवचनम् 

प्रथमा      अहम्            आवाम्           वयम् 


द्वितीया    माम्                "   "            अस्मान्

तृतीया     मया               आवाभ्याम्     अस्माभि: 

चतुर्थी      मह्यम्              "      "         अस्मभ्यम्

पञ्चमी    मत्                  "      "         अस्मत् 

षष्ठी         मम                आवयो:          अस्माकम् 

सप्तमी     मयि                "      "          अस्मासु 

Sunday, 27 November 2022

विद्वस् ( पुल्लिंग )

 विद्वस् ( पुल्लिंग ) शब्द रूप 

यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत | 

01. " विदुषे " अत्र का विभक्ति: ? 

(अ) चतुर्थी  (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया 

02. " विदुष: " अत्र का विभक्ति: ?

(अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी 

03.  " विद्वद्भ्याम् " अत्र का विभक्ति: ?

(अ) चतुर्थी  (ब) पञ्चमी (स) तृतीया  (द) न कोsपि 

04. " विद्वस् " इत्यस्य तृतीया एकवचनम् किम् भवति ?

(अ) विदुष: (ब)  विदुषा  (स) विद्वत्सु  (द) विदुषाम्  

05.  " विद्वस् " इत्यस्य षष्ठी द्विवचनम् किम् भवति ?

(अ) विदुष: (ब)  विदुषि (स) विदुषो: (द) विदुषाम् 

अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " विद्वस्  " शब्द के " पुल्लिंग " शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है | 

विभक्ति     एकवचनम्    द्विवचनम्    बहुवचनम् 

प्रथमा        विद्वान्          विद्वांसौ         विद्वांस: 

द्वितीया      विद्वांसम्        विद्वांसौ        विदुष:

तृतीया       विदुषा          विद्वद्भ्याम्    विद्वद्भि: 

चतुर्थी        विदुषे           विद्वद्भ्याम्    विद्वद्भ्य: 

पञ्चमी      विदुष:           विद्वद्भ्याम्    विद्वद्भ्य:

षष्ठी          विदुष:           विदुषो:         विदुषाम्

सप्तमी       विदुषि           विदुषो:         विद्वत्सु 

संबोधन    हे विद्वद् !      हे विद्वांसौ      हे विद्वांस: ! 
ठक् प्रत्यय के लिये क्लिक करें 


Tuesday, 15 November 2022

Sanskrit Syllabus of class 10 ( 2022-23 )

           पाठ्यक्रम ( syllabus ) 2022-23 

         Class - X ( Sanskrit Cod - 122 )

                  ( For CBSE Board Exam ) 

                             व्याकरणम्   

01. संधि: - 

व्यञ्जन संधि: - वर्ग के प्रथम वर्ण को तृतीय वर्ण , वर्ग के प्रथम वर्ण को पंचम वर्ण  | 

विसर्ग संधि: - उत्व संधि: , रत्व संधि: , विसर्ग का लोप , विसर्ग के स्थान पर श् , ष् , स्   

02. प्रत्यया:

तद्धित प्रत्यय: - मतुप् , ठक् , त्व , तल् |

स्त्रीप्रत्यय: - टाप् , ङीप् |

03. समास :-

तत्पुरुषसमास ( द्वितीया से सप्तमी पर्यन्त ) | 

अव्ययीभाव समास ( अनु , उप , सह , नीर् , प्रति , यथा ) | 

बहुब्रीहि समास , 

द्वंद समास  

04. अव्ययपदानि :- 

उच्चै: , च , श्व: , ह्य:, अद्य,अत्र , तत्र , यत्र , कुत्र , इदानीम् , अधुना , सम्प्रति , यदा , तदा , कदा , सहसा , वृथा , शनै: , अपि , कुत: इतस्ततः , यदि - तर्हि , यावत् - तावत् , 

(वाक्य प्रयोग ) | 

05. समय:  - सपाद - सार्ध - पादोन  

06. वाच्य परिवर्तनम् : - कर्तृ - कर्म - क्रिया ( केवल लट् लकारे ) 

वाच्य समझने के लिए क्लिक करें - 

07. पत्र लेखनम् :- 

मंजूषा - सहायतया औपचारिक - अनौपचारिकं पत्र लेखनं | 

08. अशुद्धि संशोधनम् :- 

वचन - लिंग - पुरुष - विभक्ति | 

09. अनुच्छेद लेखनम् |

10. चित्रवर्णनम्

11. अनुवाद: 

 हिंदी से संस्कृत में ( पांच वाक्य ) | 

12. अपठित अवबोधनम् |


Youtube पर समझने के लिये क्लिक करें -  

            ( पाठा: )

13. प्रथम: पाठ: - शुचिपर्यावरणम् |

14. द्वितीयपाठ: - बुद्धिर्बलवती सदा |

15. चतुर्थपाठ: - शिशुलालनम् |

16. पंचमपाठ: - जननी तुल्यवत्सला | 

17. षष्ठपाठ: - सुभाषितानि |

18. सप्तमपाठ: - सौहार्दप्रकृते : शोभा |

19. अष्टमपाठ: - विचित्र: साक्षी | 

20. नवम: पाठ: - सूक्तय: | 

21. द्वादश: पाठ: - अन्योक्तय: | 


Friday, 11 November 2022

राजन् शब्दरूप

 राजन् ( नकारान्त पुल्लिंग ) शब्द रूप 

यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत | 

01. "राजान: " अत्र का विभक्ति: ? 

  (अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया 

02. " राज्ञ: " अत्र का विभक्ति: ?

   (अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी 

03.  " राज्ञो: " अत्र का विभक्ति: ?

   (अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी  (द) तृतीया

04. " राजा " अत्र का विभक्ति: ?

Video के द्वारा समझने के लिए यहां क्लिक करें 

   (अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी  (द) तृतीया 

05. " राजसु "  अत्र का विभक्ति: ?

   (अ) प्रथमा (ब) सप्तमी  (स) षष्ठी  (द) तृतीया 

अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " राजन् " शब्द के शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है | 

विभक्ति     एकवचनम्    द्विवचनम्    बहुवचनम् 

प्रथमा         राजा           राजानौ      राजान: 

द्वितीया       राजानम्      राजानौ      राज्ञ: 

तृतीया         राज्ञा           राजभ्याम्   राजभि: 

चतुर्थी         राज्ञे             राजभ्याम्   राजभ्य: 

पञ्चमी       राज्ञ:            राजभ्याम्   राजभ्य:

षष्ठी           राज्ञ:             राज्ञो:         राज्ञाम्

सप्तमी       राजनि          राज्ञो :         राजसु

संबोधन      हे राजन् !     हे राजानौ !  हे राजान: ! 


Sunday, 6 November 2022

Sanskrit Syllabus Class IX 2022-23 ( II Term )

 पाठ्यक्रम ( syllabus ) 2022-23 

     Class - IX ( Sanskrit Cod - 122 )

                  ( Second Term ) 

                      व्याकरणम्   

01. संधि : 

    व्यञ्जन संधि: - जशत्व संधि: ,  " म् " स्थाने अनुस्वार: | 

     विसर्ग संधि: - उत्व संधि: , रत्व संधि: | 

02. प्रत्यया: - क्तवतु , शतृ , शानच्  | 

03. शब्दरूपाणि :

राजन् , भवत् , विद्वस् , गुणिन् , अस्मद् , युष्मद् , तत् , इदम् , किम् ( त्रिषु लिंगेषु ) 

04. धातुरूपाणि : - दा , क्री , श्रु , पा , सेव् , लभ् | 

05. कारक - उपपद - विभक्तय:

        पञ्चमी : - विना , बहि , भी , रक्ष् , ऋते | 

        षष्ठी : - उपरि , अध: , पुरत: , पृष्टतः , निर्धारणे | 

        सप्तमी : - स्निह् , निपुण , विश्वस् , पटु | 

06. उपसर्गा: - नि , अधि , अपि , अति , सु , उत् , अभि , प्रति , परि , उप | 

                         ( लेखनकौशल ) 

07. पत्र लेखनम् : - विना रिक्तस्थान सहायतया अनौपचारिकं पत्र लेखनं | 

08. संख्या : - 01 - 100 पर्यन्तम् अंकानां शब्देषु लेखनं | 

           Click here :- हिंदी से संस्कृत में अनुवाद का वीडियो मिलेगा | 

09. अनुच्छेद लेखनम् |

10. चित्रवर्णनम् | 

11. अनुवाद: | 

12. अपठित अवबोधनम् | 

            ( पाठा: )

13. नवम: पाठ: - सिकतासेतु: | 

14. दशम: पाठ: - जटायो: शौर्यम् |

15. एकादश पाठ: - पर्यावरणम् | 

16. द्वादशपाठ: - वाङ्मन: प्राणस्वरूपम् | 

** प्रश्न निर्माण | 

** विलोम पदानि |

** पर्याय पदानि | 


Monday, 31 October 2022

हिंदी से संस्कृत में अनुवाद ( परीक्षोपयोगी )

 अनुवाद ( सभी लकारों मे ) परीक्षोपयोगी  

अधोलिखितानि वाक्यानि संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत  - ( CBSE - 2022 Class X ) 

01. लिपिक अपना कार्य करता है | 

       लिपिक: स्व कार्यं करोति | 

02. दो किसानों ने खेत जोता था | 

        द्वौ कृषकौ क्षेत्रं अकर्षत: | 

03. मैं आलस्य का त्याग करूँगा | 

       अहम् आलस्यस्य त्यागं करिष्यामि | 

04. तुम सब मिलकर गीत बोलो | 

       यूयं मिलित्वा गीतं गायथ | 

05. हमें रोज व्यायाम करना चाहिये | 

       वयं प्रतिदिनं व्यायामम् कुर्याम | 

06. सफलता परिश्रम का परिणाम है | 

       सफलता परिश्रमस्य परिणाम: अस्ति | 

07. कल मोहन कहाँ था | 

       ह्य: मोहन: कुत्र आसीत् | 

Compartment exam 2022 CLASS - IX 

01. यह मेरी पुस्तक है | 

       इदम् मम पुस्तकं अस्ति | 

02. बगीचे के चारों ओर सड़क है | 

       उपवनं परित: मार्ग: अस्ति | 

03. रवि पुस्तक पढ़ता है | 

       रवि: पुस्तकं पठति | 

04. भारत की राजधानी दिल्ली है | 

       भारतस्य  राजधानी दिल्ली अस्ति | 

05. तुम्हारा मोबाइल मेरे पास है | 

       तव चलदूरवाणी मम समीपे अस्ति | 

06. भारत की राजभाषा हिन्दी है | 

       भारतस्य राजभाषा हिन्दी अस्ति | 

    Mid - Term exam 2022-23 Class - X 

01. चिकित्सालय के चारों मार्ग हैं | 

       चिकित्सालयस्य परित: मार्गा: सन्ति | 

02. तुम माँ के साथ रसोई में काम करती हो | 

       त्वं मात्रा सह पाकशालायां कार्यं करोषि | 

03. राधा ने भोजन किया | 

       राधा भोजनम् अकरोत् | 

04. कल गणतन्त्र दिवस था | 

       ह्य:  गणतन्त्रदिवस: असीत् | 

05. यमुना नदी दिल्ली में बहती है | 

       यमुना नदी देहल्यां प्रवहति | 

06. सदा सच बोलो | 

       सर्वदा सत्यं वद | 

Saturday, 22 October 2022

वाच्य परिवर्तनम् ( भाग -2) CBSE आधारित

 वाच्य परिवर्तनम् ( भाग -2 ) 

अधोलिखितेषु संवादेषु रिक्तस्थानानि वाच्यानुसारं उचितै: पदै: पूरयत् - 

   01.                   [ CBSE 2014 ]

शिक्षक: - अमन ! गत्वा पश्य ...............किं कुर्वन्ति ? 

अमन: - छात्रै: तु ....................लिख्यन्ते | 

शिक्षक: - किं त्वं लेखं .....................? 

अमन: - आम् ! ..............अपि लेख: लिख्यते | 

शिक्षक: - सुरेश: न दृश्यते | स: कुत्र ? 

अमन: - सुरेश: स्वस्थ: न अस्ति , अतः विद्यालय-चिकित्सा-कक्षे तेन ...............क्रियते | 

शिक्षक: - अस्तु , स: विश्रामम् करोति | समीचीनम् | 

    02.                         CBSE - 2016 

अध्यापिका - अनु ! किम् त्वं पाठं ...............? 

अनु - आम् , मया ......................स्मर्यते | 

अध्यापिका - तर्हि किमर्थं ...................सम्यग् उत्तरं न दीयते | 

अनु - जानामि ..................| अनभ्यासादेव | 

अध्यापिका - किं त्वया पुनरावृत्ति: ................? 

अनु - आम् , अहं पुनरावृत्तिम् करोमि | 


Click and see


   03.               CBSE - 2014 

देवांश: - मित्र ! त्वं कुत्र ( i ).............? 

हृदय: - मित्र ! ( ii ) .......... तु पुस्तकालयं गम्यते | 

देवांश: - ( iii ).........अपि त्वया सह चलामि | 

हृदय: - आगच्छ ! शीघ्रं एव आवां चलाव: |

देवांश: - आम् ! त्वया कीदृशम् पुस्तकं ( iv ) ..........| 

हृदय: - मया ज्ञानवर्धनं ( v ) ........... पठ्यते | 

देवांश: - शोभनम् | त्वमपि शोभनं बाल: अस्ति | 


   04.                   [ CBSE - 2016 ] 

श्याम: - सोहन ! किम् ....................मया सह पत्रालयं गच्छसि ? 

सोहन: - नहि , मया तु पत्रालयं न ................| अहं तु पाठं स्मरामि | 

श्याम: - शोभनम् | इदानीं त्वया ................स्मर्यते ! तदनन्तरं त्वं किं करोषि ? 

सोहन: - तत्पश्चात् माया गणितस्य अभ्यास: ............| 

श्याम: - अस्तु , ..................तु पत्रालयम् एव गम्यते | 


01. उत्तराणि :- 01. छात्रा: , 02. लेखा: , 03. लिखसि , 04. मया  

02. उत्तराणि :- 01. स्मरसि , 02. पाठ: , 03. त्वया , 04. अहम् , 05. क्रियते                  

03.उत्तराणि :- 01. गच्छसि  , 02. मया , 03. अहम्  , 04. पठ्यते , 05. पुस्तकं 

04. उत्तराणि :- 01. त्वं , 02. गम्यते , 03. पाठ: ,04. क्रियते , 05. मया 


Wednesday, 19 October 2022

वाच्यपरिवर्तनम् लट् लकारे ( active voice to passive voice )

  वाच्य परिवर्तनम् ( लट् लकार में )  

वाच्य को english में voice कहते हैं | वाच्य तीन प्रकार का होते है :- 

01. कर्तृवाच्य ( Active voice ) 

02. कर्मवाच्य (Passive voice )  

03. भाववाच्य ( Impersonal voice )   

01. कर्तृवाच्य :- इसमे कर्ता की प्रधानता होती है | कर्ता के अनुसार क्रिया के पुरुष , वचन , लिंग , एवं विभक्ति में परिवर्तन होता है | 

विशेष:- कर्ता में प्रथमा विभक्ति कर्म में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है | 

02. कर्मवाच्य :- इसमे कर्म की प्रधानता होती है | कर्म के अनुसार क्रिया के पुरुष , वचन , लिंग , एवं विभक्ति में परिवर्तन होता है | 

विशेष:- कर्ता में तृतीया विभक्ति कर्म में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है | 

03. भाववाच्य :- इसमे भाव प्रधान होता है | क्रिया हमेशा नपुंसकलिंग एकवचन या प्रथम पुरुष एकवचन में ही होती है | 


Video देखकर भी समझ सकते हैं एक बार क्लिक करें 


वाच्य परिवर्तनम् कुरुत :-  [ CBSE 2014 ]

देवांश: - मित्र ! त्वं कुत्र ( i ).............? 

हृदय: - मित्र ! ( ii ) .......... तु पुस्तकालयं गम्यते | 

देवांश: - ( iii ).........अपि त्वया सह चलामि | 

हृदय: - आगच्छ ! शीघ्रं एव आवां चलाव: |

देवांश: - आम् ! त्वया कीदृशम् पुस्तकं ( iv ) ..........| 

हृदय: - मया ज्ञानवर्धनं ( v ) ........... पठ्यते | 

देवांश: - शोभनम् | त्वमपि शोभनं बाल: अस्ति | 


उत्तराणि :- 01. गच्छसि  , 02. मया , 03. अहम्  , 04. पठ्यते , 05. पुस्तकं 

 

 कर्तृवाच्य :- बालकः विद्यालयं गच्छति | 

 कर्मवाच्य :- बालकेन विद्यालय: गम्यते |


कर्तृवाच्य :- बालका: विद्यालयं गच्छन्ति | 

कर्मवाच्य :- बालकै: विद्यालय: गम्यते | 


कर्तृवाच्य :- अशोक: क्रीडां करोति |  

कर्मवाच्य :- अशोकेन क्रीडा क्रियते | 


कर्तृवाच्य :- वयं चलचित्रं द्रष्टुम् गच्छामः |  

कर्मवाच्य :- अस्माभि: चलचित्रं द्रष्टुं गम्यते | 


कर्तृवाच्य :- माता पिता च फलानि आनयतः | 

कर्मवाच्य :- मातृ-पितृभ्याम् फलानि आनीयन्ते | 


कर्तृवाच्य :- यूयं लेखं लिखथ | 

कर्मवाच्य :-  युष्माभि: लेख: लिख्यते | 


कर्तृवाच्य :- स: इत: बसयानेन जयपुरम् गच्छति | 

कर्मवाच्य :-  तेन इत: बसयानेन जयपुरं गम्यते | 


कर्तृवाच्य :- अध्यापिका सुधाखंडेन उत्तरं लिखति | 

कर्मवाच्य :- अध्यापिकया सुधाखंडेन उत्तरं लिख्यते | 


कर्तृवाच्य :- पिता पुत्रेण सह आपणं गच्छति |

कर्मवाच्य :- पित्रा पुत्रेण सह आपणं गम्यते | 


Monday, 17 October 2022

अशुद्धि संशोधनम् भाग -2 ( पुरुष अनुसार )

  वाक्य संशोधनम् भाग - 2 ( पुरुष अनुसार )   

(नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है )

कर्ता और क्रिया का निर्धारण पुरुष के अनुसार किया जाता है | यदि प्रथम पुरुष का कर्ता है तो क्रिया भी प्रथम पुरुष की होगी | इसी तरह मध्यम पुरुष के कर्ता के साथ मध्यम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा और  उत्तम पुरुष के कर्ता के साथ उत्तम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा | 

अधोलिखितवाक्येषु रेखांकित पदेषु काश्चन अशुद्धय: सन्ति , तेषां शुद्धरूपं विकल्पेभ्य: चित्वा लिखत - 

01. आवां न चलथ: | [ Delhi 2011 ]

    (अ) तौ  (ब) युवां  (स) यूयं  (द) ता:  

02. ता: पाठं पठसि | [ All India 2011 ] 

    (अ) पठत:  (ब) पठथ:  (स) पठन्ति  (द) पठथ 

03. ता: समाचारपत्रं पठसि । [ All India 2012 ]

    (अ) पठत:  (ब) पठथ:  (स) पठन्ति  (द) पठथ 

04. त्वं कदा नाटकं द्रक्ष्यन्ति ? [ All India 2012 ,16 ] 

    (अ)  द्रक्ष्यामि  (ब) द्रक्ष्यसि  (स) पश्याव:  (द) पश्यथ: 

05. त्वं मम मित्रं अस्ति | [ Delhi 2013 ]

    (अ) भवति  (ब) अस्मि  (स) स्त:  (द) असि 

06. वयं सर्वे प्रातः उद्यानं गच्छन्ति | [ Delhi 2013 ]

    (अ) गच्छाव:  (ब) गच्छाम:  (स) गच्छथ:  (द)गमिष्यामि 

07. त्वं पाठं अपठत् | [ Delhi 2014 ]

    (अ) अपठताम्  (ब) अपठ:  (स) अपठतम्  (द) अपठत 

08. अहं नाटकं द्रक्ष्यन्ति  [ Delhi 2014 ]

    (अ)  द्रक्ष्यामि  (ब) द्रक्ष्यसि  (स) पश्याव:  (द) पश्यथ: 

09. मम समीपे पञ्च फलानि स्थ | [ All India 2014 ] 

    (अ) अस्ति  (ब) असि  (स) सन्ति  (द) स्म: 

10. वानरा: अकूर्द: | [ Delhi 2015 ]

    (अ) अकूर्दत्  (ब) अकूर्दताम्  (स) अकूर्दन्  (द) अकूर्दत 

11. अहं सेवफलं खादति | [ Delhi 2015 ] 

    (अ) आवाम्  (ब) वयम्  (स) त्वम्  (द) सः 

12. यूयं व्यर्थं न वदाव: | [ All India 2015 ]

    (अ) वदथ:  (ब) वदथ  (स) वदन्ति  (द) वदाम: 

13. आवां अस्माकं मित्रै: सह गमिष्यत: | [ All India 2015 ] 

    (अ) युवाम्  (ब) यूयम्  (स) त्वम्  (द) तौ 

14. अहं गीतां पठिष्याम: | [ Delhi 2016 ]

    (अ) पठिष्यामि  (ब) पठिष्यति  (स) पठिष्याव:  (द) पठिष्यथ 

15. ते तत्र भोजनं अकुर्व: |  [ Delhi 2016 ]            (अ) अकरोत्  (ब) अकरो:  (स) अकुर्वन्   (द) अकुरुताम्  


उत्तराणि :- 01. ब , 02. स , 03. स , 04. ब , 05. द , 06. ब , 07. ब , 08. अ , 09. स , 10. स , 11. द , 12. ब , 13. द , 14. अ , 15. स |  

Wednesday, 12 October 2022

अशुद्धि संशोधन ( वचनानुसार )

 वाक्य संशोधन ( वचन अनुसार ) 

वाक्य संशोधन करते समय छात्रों को एक बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिये कि क्रिया ( verb ) का अलग - अलग लिंग न होकर केवल एक ही लिंग होता है , परन्तु कर्ता व कर्म का लिंग एवं विभक्ति अलग - अलग होते हैं

वचन अनुसार वाक्य संशोधनम् :- इस प्रकार के वाक्य शुद्धि करते समय ध्यान रखे कि कर्ता और क्रिया का वचन एक ही होता है अर्थात यदि कर्ता में एकवचन है हो क्रिया में भी एकवचन ही होगा | इसी तरह द्विवचन और बहुवचन को समझना चाहिए | 
  
(इन प्रश्नों के उत्तर सबसे अंत मे मिलेंगे )

अधोलिखित वाक्येषु रक्तवर्णीयपदेषु काश्चन अशुद्धय: सन्ति , तेषां शुद्धरूपं विकल्पेभ्य: चित्वा लिखत - 

01. तौ तत्र किमर्थं गच्छन्ति ? [ Delhi 2011 ]

  (अ)  गच्छति   (ब) गच्छत:   (स) गच्छथ:   (द) गच्छसि 

02. यूयं कुत्र उपविशसि ? [ All India 2011] 

  (अ) उपविशथ (ब) उपविशथ: (स) उपविशन्ति (द) उपविशाम: 

03. मम समीपे द्वादश पुस्तक: सन्ति | [ Delhi 2013 , All India 2013 ] 

  (अ) पुस्तके  (ब) पुस्तका:  (स) पुस्तकानि  (द) पुस्तकेषु 

04. सर्वेषां दीनजनस्य सेवां करोतु | [ Delhi 2013 ] 

  (अ) दीनजनयो: (ब)  दीनजनानाम्  (स)  दीनजनेभ्यः (द)  दीनजनेन 

05. सा बालिका: क्रीडन्ति | [ All India 2013 ] 

  (अ) ते     (ब) ता:   (स) स:    (द) तानि 

06. एते सर्वे मम मित्रं सन्ति | [ Delhi 2014 ] 

  (अ) मित्राणि   (ब) मित्रा:   (स) मित्रे   (द) मित्र: 

Click करें कुछ नया मिलेगा


07. भवान् गृहम् गच्छन्तु | [ Delhi 2014 ] 

  (अ) भवन्तः  (ब) भवत्य:  (स) भवन्तम्  (द) भवता 

08. ता: बालिका रामायणं पठति | [ All India 2014] 

  (अ) ते   (ब) सः   (स) सा    (द) तानि 

09. भवान् सुखी भवन्तु | [ All India 2014 ]

 (अ) भवताम्    (ब) भवतु  (स) भव    (द) भवत 

10. यूयं गृहं गच्छथ: | [ Delhi 2015 ] 

  (अ) त्वम्    (ब) युवाम्    (स) तौ     (द) ते 

11. वानर: कुत्र न कूर्दन्ति ? [ Delhi 2015 ]

  (अ) कूर्दसि  (ब) कूर्दति  (स) कूर्दत:  (द) कूर्दिष्यन्ति 

12. द्वे छात्रे अत्र पठन्ति | [ All India 2015 ] 

  (अ) पठति  (ब) पठत:  (स) पठथ:  (द) पठथ 

13. गायिका: गीतानि गायति |  [ Delhi 2016 ]

  (अ) गास्यामि (ब) गायसि (स) अगायत् (द) गायन्ति 

14. त्वया सह के गच्छति

  (अ)  गच्छन्ति (ब) गच्छाम: (स) गच्छत: ( द) गच्छसि 

15. मया सह मम मित्रं अपि गच्छन्ति | 

  (अ)  मित्राणि  (ब) मित्रे  (स) मित्रा:  (द) मित्रान् 

16. ता: अत्र फलं खादतः |

  (अ) ते       (ब) त्वम्    (स) स:     (द) युवाम् 

17. मया सह ते अपि  गच्छति

  (अ) गच्छसि  ( ब) गच्छन्ति (स) गच्छथ  (द) गच्छाम 

18. त्वया सह तव पिता अपि गच्छन्ति

  (अ) गच्छति  (ब) अगच्छत्  (स) आगच्छत  (द) गच्छत: 

19. केचन जन: तत्र व्यायामम् अपि कुर्वन्ति | 

  (अ) जनान्  (ब) जनै:   (स) जना:   (द) जनम् 

20. भवान् निर्धनेभ्य: धनं यच्छन्तु

  (अ)  यच्छत  (ब) यच्छतं  (स) यच्छतु   (द) यच्छ 

21. येन जना: शिक्षित: भवेयु: | 

  (अ)  शिक्षितान्  (ब) शिक्षिता:  (स)  शिक्षितम्  (द) शिक्षितानि 

22. रामः बहूनां दिनानां सहायतां कुर्वन्ति स्म | 

  (अ) करोषि  (ब) करोमि  (स) करोति  (द) कुर्म: 

23. भवान् कुत्र गच्छन्ति

  (अ) गच्छति   (ब) गच्छसि   (स) गच्छथ   (द) गच्छामि 

24. बाला: बालै: सह क्रीडत:

  (अ) क्रीडति  (ब) क्रीडन्ति  (स) क्रीडतै:  (द) क्रीडनकानि 

25. इमे वस्त्राणि मलिनानि सन्ति | 

  (अ) इमानि  (ब) इदम्  (स) अयम्    (द) इमौ 

उत्तराणि :- 01. ब , 02. अ , 03. स , 04. ब , 05. ब , 06. अ , 07. अ , 08. स , 09. ब , 10. ब , 11. ब , 12. ब , 13. द , 14. अ , 15. अ , 16. अ , 17.ब , 18. अ , 19. स , 20. स , 21.ब , 22. स , 23. अ , 24. ब , 25. अ 


Sunday, 9 October 2022

Future tence में हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद

 हिंदी से संस्कृत में अनुवाद ( future tence ) लृट् लकार में 

 लृट् लकार को English में future tence और हिंदी में भविष्यत् काल कहते हैं | 

भविष्यत्  काल की पहचान है :- गा , गे , गी |

01. मैं अपने मित्र को पत्र लिखूंगा |

       अहं स्व मित्रं पत्रं लेखिष्यामि | 

02. तुम विद्यालय कब जाओगी  |

       त्वं विद्यालयं कदा गमिष्यसि | 

03.  बालक बाजार से पुस्तक लाएगा |

        बालकः आपणात् पुस्तकं आनेष्यति | 

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे :- 

04. केशव फल लाएगा है |

       केशव: फलानि  आनेष्यति | 

05. हम सब फ़िल्म देखेंगे |

       वयं चलचित्रं द्रक्ष्याम: | 

06. तुम दोनों गीत गाओगे |

       युवां गीतं गाष्यथ: | 

07. मैं पढ़ाई करूँगा |

      अहं अध्ययनं करिष्यामि | 

08. हम दोनों पुस्तक पढ़ेंगे |

      आवां पुस्तकं पठिष्याव: | 

09. बालक विद्यालय जाएगा | 

       बालकः विद्यालयं गमिष्यति | 

10. बालक विद्यालय जाएंगे | 

       बालका: विद्यालयं गमिष्यन्ति | 

( यहां पर कर्ता को देखने पर ज्ञात होता है कि कर्ता में एकवचन है लेकिन क्रिया को देखने पर ज्ञात होता है कि यह वाक्य तो बहुवचन का है )

11. कविता खेल खलेगी | 

       कविता क्रीडां खेलिष्यति | 

12. हम सब फिल्म देखने के लिये जाएंगे | 

       वयं चलचित्रं द्रष्टुम् गमिष्यामः | 

13. माता और पिता फल लाएंगे | 

       माता पिता च फलानि आनेष्यतः | 

14. पेड़ से पत्ते  गिरेंगे | 

       वृक्षात् पत्राणि पतिष्यन्ति | 

15. बालिकाओं में प्रियंका होशियार होगी | 

       बालिकासु  प्रियंका चतुरतमा भविष्यति | 

16. तुम सब लेख लिखोगे | 

       यूयं लेखं लेखिष्यथ | 

17. वह यहां से बस के द्वारा जयपुर जाएगा | 

       स: इत: बसयानेन जयपुरम् गमिष्यति | 

18. अध्यापिका चॉक से लिखेगी | 

       अध्यापिका सुधाखंडेन लेखिष्यति | 

19. छात्र किताब से पढेंगे |

       छात्रा: पुस्तकेन पठिष्यन्ति | 

20. पिता पुत्र के साथ बाजार जाएंगे | 

       पिता पुत्रेण सह आपणं गमिष्यति |

इस प्रकार से हम लृट् लकार ( future tence ) में हिंदी से संस्कृत में अनुवाद कर सकते हैं | 


Saturday, 8 October 2022

किम् शब्द के शब्द रूप ( तीनों लिंगों में )

            किम् शब्द रूप 

             किम् ( कौन ) पुल्लिंग 

विभक्ति  एकवचनम्  द्विवचनम्  बहुवचनम् 

प्रथमा         क:             कौ             के 

द्वितीया       कम्            कौ            कान् 

तृतीया         केन           काभ्याम्      कै: 

चतुर्थी         कस्मै          काभ्याम्      केभ्य: 

पञ्चमी       कस्मात्       काभ्याम्      केभ्य:

षष्ठी            कस्य          कयो:         केषाम् 

सप्तमी        कस्मिन्      कयो:         केषु  

Video के माध्यम से समझने के लिए क्लिक करें 

             किम् ( कौन ) स्त्रीलिंग  

विभक्ति  एकवचनम्  द्विवचनम्  बहुवचनम् 

प्रथमा         का             के              का: 

द्वितीया       काम्          के              का: 

तृतीया         कया          काभ्याम्      काभि: 

चतुर्थी         कस्यै          काभ्याम्      काभ्य: 

पञ्चमी       कस्या:        काभ्याम्      काभ्य:

षष्ठी            कस्या:        कयो:         कासाम् 

सप्तमी        कस्याम्       कयो:         कासु 

            किम् ( कौन ) नपुंसकलिंग  

विभक्ति  एकवचनम्  द्विवचनम्  बहुवचनम् 

प्रथमा         किम्           के              कानि 

द्वितीया       किम्           के              कानि

तृतीया        केन             काभ्याम्      कै: 

चतुर्थी         कस्मै           काभ्याम्     केभ्य: 

पञ्चमी       कस्मात्        काभ्याम्     केभ्य:

षष्ठी            कस्य            कयो:        केषाम् 

सप्तमी        कस्मिन्        कयो:         केषु 


Friday, 7 October 2022

दा धातु ( पांचों लकारों में )

  धातु रूप " दा  ( देना ) 

लट् लकार ( वर्तमान काल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम     ददाति         दत्त:        ददति  

मध्यम    ददासि        दत्थ:       दत्थ 

उत्तम     ददामि         दद्व:        दद्म: 

लङ् लकार ( भूतकाल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन      बहुवचन 

प्रथम    अददात्       अदत्ताम्    अददु: 

मध्यम   अददा:        अदत्तम्     अदत्त

उत्तम    अददाम्       अदद्व        अदद्म 


वीडियो के लिए क्लिक करे 


लृट् लकार ( भविष्यत काल ) 

पुरुष    एकवचन      द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     दास्यति      दास्यत:      दास्यन्ति  

मध्यम    दास्यसि     दास्यथ:      दास्यथ 

उत्तम      दास्यामि    दास्याव:     दास्याम: 

लोट् लकार ( आज्ञार्थ काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     ददातु         दत्ताम्       ददतु  

मध्यम    देहि           दत्तम्        दत्त 

उत्तम      ददानि       ददाव        ददाम 

विधिलिंग लकार ( चाहिये अर्थ ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम    दद्यात्       दद्याताम्     दद्यु: 

मध्यम   दद्या:        दद्यातम्      दद्यात 

उत्तम     दद्याम्      दद्याव         दद्याम 


गम् धातु रूप पांचों लकारों में

  धातु रूप " गम्   (जाना ) गच्छ  

लट् लकार ( वर्तमान काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम    गच्छति        गच्छत:     गच्छन्ति 

मध्यम   गच्छसि       गच्छथ:     गच्छथ 

उत्तम    गच्छामि       गच्छाव:    गच्छाम: 


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लङ् लकार ( भूतकाल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन      बहुवचन 

प्रथम   अगच्छत्      अगच्छताम्   अगच्छन् 

मध्यम  अगच्छ:       अगच्छतम्   अगच्छत 

उत्तम   अगच्छम्      अगच्छाव     अगच्छाम 

लृट् लकार ( भविष्यत काल ) 

पुरुष    एकवचन      द्विवचन       बहुवचन 

प्रथम    गमिष्यति   गमिष्यत:   गमिष्यन्ति  

मध्यम   गमिष्यसि  गमिष्यथ:   गमिष्यथ 

उत्तम    गमिष्यामि  गमिष्याव:  गमिष्याम: 

लोट् लकार ( आज्ञार्थ काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     गच्छतु      गच्छताम्     गच्छन्तु  

मध्यम    गच्छ        गच्छतम्      गच्छत 

उत्तम     गच्छानि    गच्छाव       गच्छाम 

विधिलिंग लकार ( चाहिये अर्थ ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम    गच्छेत्       गच्छेताम्     गच्छेयु: 

मध्यम   गच्छे:        गच्छेतम्      गच्छेत 

उत्तम     गच्छेयम्    गच्छेव        गच्छेम 


खाद् धातु रूप (पांचों लकारों में)

  धातु रूप " खाद्  (खाना , भक्षणे ) 

लट् लकार ( वर्तमान काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम    खादति        खादत:     खादन्ति 

मध्यम   खादसि       खादथ:     खादथ 

उत्तम    खादामि       खादाव:    खादाम: 

लङ् लकार ( भूतकाल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन      बहुवचन 

प्रथम   अखादत्      अखादताम्   अखादन् 

मध्यम  अखाद:       अखादतम्   अखादत 

उत्तम   अखादम्      अखादाव     अखादाम 

लृट् लकार ( भविष्यत काल ) 

पुरुष    एकवचन      द्विवचन       बहुवचन 

प्रथम    खादिष्यति   खादिष्यत:   खादिष्यन्ति  

मध्यम   खादिष्यसि  खादिष्यथ:   खादिष्यथ 

उत्तम    खादिष्यामि  खादिष्याव:  खादिष्याम: 

लोट् लकार ( आज्ञार्थ काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     खादतु      खादताम्     खादन्तु  

मध्यम    खाद        खादतम्      खादत 

उत्तम     खादानि    खादाव       खादाम 

विधिलिंग लकार ( चाहिये अर्थ ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम    खादेत्       खादेताम्     खादेयु: 

मध्यम   खादे:        खादेतम्      खादेत 

उत्तम     खादेयम्    खादेव        खादेम 

विद्या आधारित श्लोक

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