विद्या आधारित श्लोक
संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हिन्दी अनुवाद सहित उल्लेख यहां किया गया है ।
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संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हिन्दी अनुवाद सहित उल्लेख यहां किया गया है ।
प्रश्न निर्माण करना बहुत ही सरल है | सिर्फ हमे शब्द रूप का ज्ञान होना आवश्यक है , जिसमें अकारान्त ( पुलिङ्ग ) , आकारान्त ( स्त्रीलिंग ) , ईकारांत (स्त्रीलिंग ) , और नपुंसकलिंग शब्द रूप शामिल है |
प्रश्न निर्माण किम् शब्द के शब्द रूप से होता है अतः हमें किम् शब्द के शब्द रूप याद होना बहुत ही आवश्यक है |
यदि स्थान वाचक शब्द हो तो " कुत्र " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |
यदि संख्या वाचक शब्द हो तो " कति " शब्द का प्रयोग करना चाहिये |
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है -
रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्न निर्माणं कुरुत -
01. वसन्ते सरसा: रसाला: लसन्ति |
02. सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता |
03. लुब्धया बालिकया लुब्धस्य फलं प्राप्तम् |
04. खलानाम् मैत्री आरम्भगुर्वी भवति |
05. मोदकानि पूजानिमित्तानि रचितानि आसन् |
06. जन्तो: मूढ़ता निद्रा भवति |
07. सज्जना: एव शशिकिरणसमा: भवन्ति |(CBSE 2011)
08. गुरुवचनम् उपादेयं भवति | ( CBSE 2011 )
09. प्राणिनाम् मूढ़ता निद्रा कथिता|(CBSE 2011)
10. साधुजनमैत्री सुखदा भवति | (CBSE 2012 )
11. विनितस्य जनस्य वशे प्राणिगण:|(CBSE 2012)
इन से संबंधित विडियो के लिए यहां क्लिक करें
12. लोके चक्षुष: दानं दुष्करं अस्ति |(CBSE 2014)
13. अनृतं वदसि चेत् काक: दशेत् |(CBSE 2014)
14. सर्वेषाम् एव महत्त्वं विद्यते | ( CBSE 2015 )
15. मम पिच्छानाम् अपूर्वं सौन्दर्यम्|(CBSE 2016)
16. छात्रा: उद्याने क्रीडन्ति |
17. अस्माकं विद्यालये एक सहस्र पञ्च शतं छात्रा: सन्ति |
18. कश्चित् कृषक: बलिवर्दाभ्यां क्षेत्रकर्षणम् कुर्वन्नासित् |
19. दशरथस्य चत्वारः पुत्रा: आसन् |
20. भारतस्य प्रथम राष्ट्रपति: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: आसीत् |
उत्तराणि :-
01. के , 02. कस्मात् , 03. कया , 04. केषाम् ,
05. कानि ,06. का , 07. के , 08. किम् ,
09. केषाम् , 10. कीदृश: , 11. कस्य , 12. कस्य ,
13. क: , 14. केषाम् , 15. कासाम् , 16. कुत्र ,
17. कति , 18. काभ्याम् , 19. कति , 20. क: |
यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत |
01. "भवान् " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया
02. " भवत: " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी
03. " भवति " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) सप्तमी (स) षष्ठी (द) तृतीया
04. " भवताम् " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी (द) तृतीया
05. " भवते " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) चतुर्थी (ब) सप्तमी (स) षष्ठी (द) तृतीया
अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " भवत् " शब्द के शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है |
विभक्ति एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा भवान् भवन्तौ भवन्तः
द्वितीया भवन्तम् भवन्तौ भवत:
तृतीया भवता भवद्भ्याम् भवद्भि:
चतुर्थी भवते भवद्भ्याम् भवद्भ्य:
पञ्चमी भवत: भवद्भ्याम् भवद्भ्य:
षष्ठी भवत: भवतो: भवताम्
सप्तमी भवति भवतो: भवत्सु
संबोधन हे भवन्! हे भवन्तौ! हे भवन्तः!
सामान्यतः बहुव्रीहि समास के पांच भेद होते है :- 01. व्यधिकरण बहुव्रीहि समास 02. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास 03. तुल्य योग्य बहुव्रीहि समास 04. नञ बहुव्रीहि समास 05. उपमानवाचक बहुव्रीहि समास |
(अ) चतुर्थी (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया
(अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी
(अ) चतुर्थी (ब) पञ्चमी (स) तृतीया (द) न कोsपि
(अ) विदुष: (ब) विदुषा (स) विद्वत्सु (द) विदुषाम्
(अ) विदुष: (ब) विदुषि (स) विदुषो: (द) विदुषाम्
अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " विद्वस् " शब्द के " पुल्लिंग " शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है |
विभक्ति एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा विद्वान् विद्वांसौ विद्वांस:
द्वितीया विद्वांसम् विद्वांसौ विदुष:
तृतीया विदुषा विद्वद्भ्याम् विद्वद्भि:
चतुर्थी विदुषे विद्वद्भ्याम् विद्वद्भ्य:
पञ्चमी विदुष: विद्वद्भ्याम् विद्वद्भ्य:
षष्ठी विदुष: विदुषो: विदुषाम्
सप्तमी विदुषि विदुषो: विद्वत्सु
( For CBSE Board Exam )
01. संधि: -
व्यञ्जन संधि: - वर्ग के प्रथम वर्ण को तृतीय वर्ण , वर्ग के प्रथम वर्ण को पंचम वर्ण |
विसर्ग संधि: - उत्व संधि: , रत्व संधि: , विसर्ग का लोप , विसर्ग के स्थान पर श् , ष् , स्
02. प्रत्यया: -
तद्धित प्रत्यय: - मतुप् , ठक् , त्व , तल् |
स्त्रीप्रत्यय: - टाप् , ङीप् |
03. समास :-
तत्पुरुषसमास ( द्वितीया से सप्तमी पर्यन्त ) |
अव्ययीभाव समास ( अनु , उप , सह , नीर् , प्रति , यथा ) |
बहुब्रीहि समास ,
द्वंद समास
04. अव्ययपदानि :-
उच्चै: , च , श्व: , ह्य:, अद्य,अत्र , तत्र , यत्र , कुत्र , इदानीम् , अधुना , सम्प्रति , यदा , तदा , कदा , सहसा , वृथा , शनै: , अपि , कुत: इतस्ततः , यदि - तर्हि , यावत् - तावत् ,
(वाक्य प्रयोग ) |
05. समय: - सपाद - सार्ध - पादोन
06. वाच्य परिवर्तनम् : - कर्तृ - कर्म - क्रिया ( केवल लट् लकारे )
वाच्य समझने के लिए क्लिक करें -
07. पत्र लेखनम् :-
मंजूषा - सहायतया औपचारिक - अनौपचारिकं पत्र लेखनं |
08. अशुद्धि संशोधनम् :-
वचन - लिंग - पुरुष - विभक्ति |
09. अनुच्छेद लेखनम् |
10. चित्रवर्णनम् |
11. अनुवाद:
हिंदी से संस्कृत में ( पांच वाक्य ) |
12. अपठित अवबोधनम् |
Youtube पर समझने के लिये क्लिक करें -
13. प्रथम: पाठ: - शुचिपर्यावरणम् |
14. द्वितीयपाठ: - बुद्धिर्बलवती सदा |
15. चतुर्थपाठ: - शिशुलालनम् |
16. पंचमपाठ: - जननी तुल्यवत्सला |
17. षष्ठपाठ: - सुभाषितानि |
18. सप्तमपाठ: - सौहार्दप्रकृते : शोभा |
19. अष्टमपाठ: - विचित्र: साक्षी |
20. नवम: पाठ: - सूक्तय: |
21. द्वादश: पाठ: - अन्योक्तय: |
यथानिर्देशम् उचितविभक्तिम् प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पुर्णम् कुरुत |
01. "राजान: " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) पञ्चमी (द) तृतीया
02. " राज्ञ: " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) तृतीया (स) पञ्चमी (द) चतुर्थी
03. " राज्ञो: " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी (द) तृतीया
04. " राजा " अत्र का विभक्ति: ?
Video के द्वारा समझने के लिए यहां क्लिक करें
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) षष्ठी (द) तृतीया
05. " राजसु " अत्र का विभक्ति: ?
(अ) प्रथमा (ब) सप्तमी (स) षष्ठी (द) तृतीया
अब आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिये निम्नलिखित " राजन् " शब्द के शब्दरूप याद करने बहुत ही जरूरी है |
विभक्ति एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा राजा राजानौ राजान:
द्वितीया राजानम् राजानौ राज्ञ:
तृतीया राज्ञा राजभ्याम् राजभि:
चतुर्थी राज्ञे राजभ्याम् राजभ्य:
पञ्चमी राज्ञ: राजभ्याम् राजभ्य:
षष्ठी राज्ञ: राज्ञो: राज्ञाम्
सप्तमी राजनि राज्ञो : राजसु
संबोधन हे राजन् ! हे राजानौ ! हे राजान: !
01. संधि :
व्यञ्जन संधि: - जशत्व संधि: , " म् " स्थाने अनुस्वार: |
विसर्ग संधि: - उत्व संधि: , रत्व संधि: |
02. प्रत्यया: - क्तवतु , शतृ , शानच् |
03. शब्दरूपाणि :
राजन् , भवत् , विद्वस् , गुणिन् , अस्मद् , युष्मद् , तत् , इदम् , किम् ( त्रिषु लिंगेषु )
04. धातुरूपाणि : - दा , क्री , श्रु , पा , सेव् , लभ् |
05. कारक - उपपद - विभक्तय: -
पञ्चमी : - विना , बहि , भी , रक्ष् , ऋते |
षष्ठी : - उपरि , अध: , पुरत: , पृष्टतः , निर्धारणे |
सप्तमी : - स्निह् , निपुण , विश्वस् , पटु |
06. उपसर्गा: - नि , अधि , अपि , अति , सु , उत् , अभि , प्रति , परि , उप |
07. पत्र लेखनम् : - विना रिक्तस्थान सहायतया अनौपचारिकं पत्र लेखनं |
08. संख्या : - 01 - 100 पर्यन्तम् अंकानां शब्देषु लेखनं |
Click here :- हिंदी से संस्कृत में अनुवाद का वीडियो मिलेगा |
09. अनुच्छेद लेखनम् |
10. चित्रवर्णनम् |
11. अनुवाद: |
12. अपठित अवबोधनम् |
13. नवम: पाठ: - सिकतासेतु: |
14. दशम: पाठ: - जटायो: शौर्यम् |
15. एकादश पाठ: - पर्यावरणम् |
16. द्वादशपाठ: - वाङ्मन: प्राणस्वरूपम् |
** प्रश्न निर्माण |
** विलोम पदानि |
** पर्याय पदानि |
अधोलिखितानि वाक्यानि संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत - ( CBSE - 2022 Class X )
01. लिपिक अपना कार्य करता है |
लिपिक: स्व कार्यं करोति |
02. दो किसानों ने खेत जोता था |
द्वौ कृषकौ क्षेत्रं अकर्षत: |
03. मैं आलस्य का त्याग करूँगा |
अहम् आलस्यस्य त्यागं करिष्यामि |
04. तुम सब मिलकर गीत बोलो |
यूयं मिलित्वा गीतं गायथ |
05. हमें रोज व्यायाम करना चाहिये |
वयं प्रतिदिनं व्यायामम् कुर्याम |
06. सफलता परिश्रम का परिणाम है |
सफलता परिश्रमस्य परिणाम: अस्ति |
07. कल मोहन कहाँ था |
ह्य: मोहन: कुत्र आसीत् |
Compartment exam 2022 CLASS - IX
01. यह मेरी पुस्तक है |
इदम् मम पुस्तकं अस्ति |
02. बगीचे के चारों ओर सड़क है |
उपवनं परित: मार्ग: अस्ति |
03. रवि पुस्तक पढ़ता है |
रवि: पुस्तकं पठति |
04. भारत की राजधानी दिल्ली है |
भारतस्य राजधानी दिल्ली अस्ति |
05. तुम्हारा मोबाइल मेरे पास है |
तव चलदूरवाणी मम समीपे अस्ति |
06. भारत की राजभाषा हिन्दी है |
भारतस्य राजभाषा हिन्दी अस्ति |
Mid - Term exam 2022-23 Class - X
01. चिकित्सालय के चारों मार्ग हैं |
चिकित्सालयस्य परित: मार्गा: सन्ति |
02. तुम माँ के साथ रसोई में काम करती हो |
त्वं मात्रा सह पाकशालायां कार्यं करोषि |
03. राधा ने भोजन किया |
राधा भोजनम् अकरोत् |
04. कल गणतन्त्र दिवस था |
ह्य: गणतन्त्रदिवस: असीत् |
05. यमुना नदी दिल्ली में बहती है |
यमुना नदी देहल्यां प्रवहति |
06. सदा सच बोलो |
सर्वदा सत्यं वद |
अधोलिखितेषु संवादेषु रिक्तस्थानानि वाच्यानुसारं उचितै: पदै: पूरयत् -
01. [ CBSE 2014 ]
शिक्षक: - अमन ! गत्वा पश्य ...............किं कुर्वन्ति ?
अमन: - छात्रै: तु ....................लिख्यन्ते |
शिक्षक: - किं त्वं लेखं .....................?
अमन: - आम् ! ..............अपि लेख: लिख्यते |
शिक्षक: - सुरेश: न दृश्यते | स: कुत्र ?
अमन: - सुरेश: स्वस्थ: न अस्ति , अतः विद्यालय-चिकित्सा-कक्षे तेन ...............क्रियते |
शिक्षक: - अस्तु , स: विश्रामम् करोति | समीचीनम् |
02. CBSE - 2016
अध्यापिका - अनु ! किम् त्वं पाठं ...............?
अनु - आम् , मया ......................स्मर्यते |
अध्यापिका - तर्हि किमर्थं ...................सम्यग् उत्तरं न दीयते |
अनु - जानामि ..................| अनभ्यासादेव |
अध्यापिका - किं त्वया पुनरावृत्ति: ................?
अनु - आम् , अहं पुनरावृत्तिम् करोमि |
03. CBSE - 2014
देवांश: - मित्र ! त्वं कुत्र ( i ).............?
हृदय: - मित्र ! ( ii ) .......... तु पुस्तकालयं गम्यते |
देवांश: - ( iii ).........अपि त्वया सह चलामि |
हृदय: - आगच्छ ! शीघ्रं एव आवां चलाव: |
देवांश: - आम् ! त्वया कीदृशम् पुस्तकं ( iv ) ..........|
हृदय: - मया ज्ञानवर्धनं ( v ) ........... पठ्यते |
देवांश: - शोभनम् | त्वमपि शोभनं बाल: अस्ति |
04. [ CBSE - 2016 ]
श्याम: - सोहन ! किम् ....................मया सह पत्रालयं गच्छसि ?
सोहन: - नहि , मया तु पत्रालयं न ................| अहं तु पाठं स्मरामि |
श्याम: - शोभनम् | इदानीं त्वया ................स्मर्यते ! तदनन्तरं त्वं किं करोषि ?
सोहन: - तत्पश्चात् माया गणितस्य अभ्यास: ............|
श्याम: - अस्तु , ..................तु पत्रालयम् एव गम्यते |
01. उत्तराणि :- 01. छात्रा: , 02. लेखा: , 03. लिखसि , 04. मया
02. उत्तराणि :- 01. स्मरसि , 02. पाठ: , 03. त्वया , 04. अहम् , 05. क्रियते
03.उत्तराणि :- 01. गच्छसि , 02. मया , 03. अहम् , 04. पठ्यते , 05. पुस्तकं
04. उत्तराणि :- 01. त्वं , 02. गम्यते , 03. पाठ: ,04. क्रियते , 05. मया
वाच्य को english में voice कहते हैं | वाच्य तीन प्रकार का होते है :-
01. कर्तृवाच्य ( Active voice )
02. कर्मवाच्य (Passive voice )
03. भाववाच्य ( Impersonal voice )
01. कर्तृवाच्य :- इसमे कर्ता की प्रधानता होती है | कर्ता के अनुसार क्रिया के पुरुष , वचन , लिंग , एवं विभक्ति में परिवर्तन होता है |
विशेष:- कर्ता में प्रथमा विभक्ति कर्म में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है |
02. कर्मवाच्य :- इसमे कर्म की प्रधानता होती है | कर्म के अनुसार क्रिया के पुरुष , वचन , लिंग , एवं विभक्ति में परिवर्तन होता है |
विशेष:- कर्ता में तृतीया विभक्ति कर्म में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है |
03. भाववाच्य :- इसमे भाव प्रधान होता है | क्रिया हमेशा नपुंसकलिंग एकवचन या प्रथम पुरुष एकवचन में ही होती है |
Video देखकर भी समझ सकते हैं एक बार क्लिक करें
देवांश: - मित्र ! त्वं कुत्र ( i ).............?
हृदय: - मित्र ! ( ii ) .......... तु पुस्तकालयं गम्यते |
देवांश: - ( iii ).........अपि त्वया सह चलामि |
हृदय: - आगच्छ ! शीघ्रं एव आवां चलाव: |
देवांश: - आम् ! त्वया कीदृशम् पुस्तकं ( iv ) ..........|
हृदय: - मया ज्ञानवर्धनं ( v ) ........... पठ्यते |
देवांश: - शोभनम् | त्वमपि शोभनं बाल: अस्ति |
उत्तराणि :- 01. गच्छसि , 02. मया , 03. अहम् , 04. पठ्यते , 05. पुस्तकं
कर्तृवाच्य :- बालकः विद्यालयं गच्छति |
कर्मवाच्य :- बालकेन विद्यालय: गम्यते |
कर्तृवाच्य :- बालका: विद्यालयं गच्छन्ति |
कर्मवाच्य :- बालकै: विद्यालय: गम्यते |
कर्तृवाच्य :- अशोक: क्रीडां करोति |
कर्मवाच्य :- अशोकेन क्रीडा क्रियते |
कर्तृवाच्य :- वयं चलचित्रं द्रष्टुम् गच्छामः |
कर्मवाच्य :- अस्माभि: चलचित्रं द्रष्टुं गम्यते |
कर्तृवाच्य :- माता पिता च फलानि आनयतः |
कर्मवाच्य :- मातृ-पितृभ्याम् फलानि आनीयन्ते |
कर्तृवाच्य :- यूयं लेखं लिखथ |
कर्मवाच्य :- युष्माभि: लेख: लिख्यते |
कर्तृवाच्य :- स: इत: बसयानेन जयपुरम् गच्छति |
कर्मवाच्य :- तेन इत: बसयानेन जयपुरं गम्यते |
कर्तृवाच्य :- अध्यापिका सुधाखंडेन उत्तरं लिखति |
कर्मवाच्य :- अध्यापिकया सुधाखंडेन उत्तरं लिख्यते |
कर्तृवाच्य :- पिता पुत्रेण सह आपणं गच्छति |
कर्मवाच्य :- पित्रा पुत्रेण सह आपणं गम्यते |
कर्ता और क्रिया का निर्धारण पुरुष के अनुसार किया जाता है | यदि प्रथम पुरुष का कर्ता है तो क्रिया भी प्रथम पुरुष की होगी | इसी तरह मध्यम पुरुष के कर्ता के साथ मध्यम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा और उत्तम पुरुष के कर्ता के साथ उत्तम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा |
अधोलिखितवाक्येषु रेखांकित पदेषु काश्चन अशुद्धय: सन्ति , तेषां शुद्धरूपं विकल्पेभ्य: चित्वा लिखत -
01. आवां न चलथ: | [ Delhi 2011 ]
(अ) तौ (ब) युवां (स) यूयं (द) ता:
02. ता: पाठं पठसि | [ All India 2011 ]
(अ) पठत: (ब) पठथ: (स) पठन्ति (द) पठथ
03. ता: समाचारपत्रं पठसि । [ All India 2012 ]
(अ) पठत: (ब) पठथ: (स) पठन्ति (द) पठथ
04. त्वं कदा नाटकं द्रक्ष्यन्ति ? [ All India 2012 ,16 ]
(अ) द्रक्ष्यामि (ब) द्रक्ष्यसि (स) पश्याव: (द) पश्यथ:
05. त्वं मम मित्रं अस्ति | [ Delhi 2013 ]
(अ) भवति (ब) अस्मि (स) स्त: (द) असि
06. वयं सर्वे प्रातः उद्यानं गच्छन्ति | [ Delhi 2013 ]
(अ) गच्छाव: (ब) गच्छाम: (स) गच्छथ: (द)गमिष्यामि
07. त्वं पाठं अपठत् | [ Delhi 2014 ]
(अ) अपठताम् (ब) अपठ: (स) अपठतम् (द) अपठत
08. अहं नाटकं द्रक्ष्यन्ति | [ Delhi 2014 ]
(अ) द्रक्ष्यामि (ब) द्रक्ष्यसि (स) पश्याव: (द) पश्यथ:
09. मम समीपे पञ्च फलानि स्थ | [ All India 2014 ]
(अ) अस्ति (ब) असि (स) सन्ति (द) स्म:
10. वानरा: अकूर्द: | [ Delhi 2015 ]
(अ) अकूर्दत् (ब) अकूर्दताम् (स) अकूर्दन् (द) अकूर्दत
11. अहं सेवफलं खादति | [ Delhi 2015 ]
(अ) आवाम् (ब) वयम् (स) त्वम् (द) सः
12. यूयं व्यर्थं न वदाव: | [ All India 2015 ]
(अ) वदथ: (ब) वदथ (स) वदन्ति (द) वदाम:
13. आवां अस्माकं मित्रै: सह गमिष्यत: | [ All India 2015 ]
(अ) युवाम् (ब) यूयम् (स) त्वम् (द) तौ
14. अहं गीतां पठिष्याम: | [ Delhi 2016 ]
(अ) पठिष्यामि (ब) पठिष्यति (स) पठिष्याव: (द) पठिष्यथ
15. ते तत्र भोजनं अकुर्व: | [ Delhi 2016 ] (अ) अकरोत् (ब) अकरो: (स) अकुर्वन् (द) अकुरुताम्
उत्तराणि :- 01. ब , 02. स , 03. स , 04. ब , 05. द , 06. ब , 07. ब , 08. अ , 09. स , 10. स , 11. द , 12. ब , 13. द , 14. अ , 15. स |
वाक्य संशोधन करते समय छात्रों को एक बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिये कि क्रिया ( verb ) का अलग - अलग लिंग न होकर केवल एक ही लिंग होता है , परन्तु कर्ता व कर्म का लिंग एवं विभक्ति अलग - अलग होते हैं |
01. तौ तत्र किमर्थं गच्छन्ति ? [ Delhi 2011 ]
(अ) गच्छति (ब) गच्छत: (स) गच्छथ: (द) गच्छसि
02. यूयं कुत्र उपविशसि ? [ All India 2011]
(अ) उपविशथ (ब) उपविशथ: (स) उपविशन्ति (द) उपविशाम:
03. मम समीपे द्वादश पुस्तक: सन्ति | [ Delhi 2013 , All India 2013 ]
(अ) पुस्तके (ब) पुस्तका: (स) पुस्तकानि (द) पुस्तकेषु
04. सर्वेषां दीनजनस्य सेवां करोतु | [ Delhi 2013 ]
(अ) दीनजनयो: (ब) दीनजनानाम् (स) दीनजनेभ्यः (द) दीनजनेन
05. सा बालिका: क्रीडन्ति | [ All India 2013 ]
(अ) ते (ब) ता: (स) स: (द) तानि
06. एते सर्वे मम मित्रं सन्ति | [ Delhi 2014 ]
(अ) मित्राणि (ब) मित्रा: (स) मित्रे (द) मित्र:
07. भवान् गृहम् गच्छन्तु | [ Delhi 2014 ]
(अ) भवन्तः (ब) भवत्य: (स) भवन्तम् (द) भवता
08. ता: बालिका रामायणं पठति | [ All India 2014]
(अ) ते (ब) सः (स) सा (द) तानि
09. भवान् सुखी भवन्तु | [ All India 2014 ]
(अ) भवताम् (ब) भवतु (स) भव (द) भवत
10. यूयं गृहं गच्छथ: | [ Delhi 2015 ]
(अ) त्वम् (ब) युवाम् (स) तौ (द) ते
11. वानर: कुत्र न कूर्दन्ति ? [ Delhi 2015 ]
(अ) कूर्दसि (ब) कूर्दति (स) कूर्दत: (द) कूर्दिष्यन्ति
12. द्वे छात्रे अत्र पठन्ति | [ All India 2015 ]
(अ) पठति (ब) पठत: (स) पठथ: (द) पठथ
13. गायिका: गीतानि गायति | [ Delhi 2016 ]
(अ) गास्यामि (ब) गायसि (स) अगायत् (द) गायन्ति
14. त्वया सह के गच्छति ?
(अ) गच्छन्ति (ब) गच्छाम: (स) गच्छत: ( द) गच्छसि
15. मया सह मम मित्रं अपि गच्छन्ति |
(अ) मित्राणि (ब) मित्रे (स) मित्रा: (द) मित्रान्
16. ता: अत्र फलं खादतः |
(अ) ते (ब) त्वम् (स) स: (द) युवाम्
17. मया सह ते अपि गच्छति |
(अ) गच्छसि ( ब) गच्छन्ति (स) गच्छथ (द) गच्छाम
18. त्वया सह तव पिता अपि गच्छन्ति |
(अ) गच्छति (ब) अगच्छत् (स) आगच्छत (द) गच्छत:
19. केचन जन: तत्र व्यायामम् अपि कुर्वन्ति |
(अ) जनान् (ब) जनै: (स) जना: (द) जनम्
20. भवान् निर्धनेभ्य: धनं यच्छन्तु |
(अ) यच्छत (ब) यच्छतं (स) यच्छतु (द) यच्छ
21. येन जना: शिक्षित: भवेयु: |
(अ) शिक्षितान् (ब) शिक्षिता: (स) शिक्षितम् (द) शिक्षितानि
22. रामः बहूनां दिनानां सहायतां कुर्वन्ति स्म |
(अ) करोषि (ब) करोमि (स) करोति (द) कुर्म:
23. भवान् कुत्र गच्छन्ति ?
(अ) गच्छति (ब) गच्छसि (स) गच्छथ (द) गच्छामि
24. बाला: बालै: सह क्रीडत: |
(अ) क्रीडति (ब) क्रीडन्ति (स) क्रीडतै: (द) क्रीडनकानि
25. इमे वस्त्राणि मलिनानि सन्ति |
(अ) इमानि (ब) इदम् (स) अयम् (द) इमौ
उत्तराणि :- 01. ब , 02. अ , 03. स , 04. ब , 05. ब , 06. अ , 07. अ , 08. स , 09. ब , 10. ब , 11. ब , 12. ब , 13. द , 14. अ , 15. अ , 16. अ , 17.ब , 18. अ , 19. स , 20. स , 21.ब , 22. स , 23. अ , 24. ब , 25. अ
लृट् लकार को English में future tence और हिंदी में भविष्यत् काल कहते हैं |
भविष्यत् काल की पहचान है :- गा , गे , गी |
01. मैं अपने मित्र को पत्र लिखूंगा |
अहं स्व मित्रं पत्रं लेखिष्यामि |
02. तुम विद्यालय कब जाओगी |
त्वं विद्यालयं कदा गमिष्यसि |
03. बालक बाजार से पुस्तक लाएगा |
बालकः आपणात् पुस्तकं आनेष्यति |
04. केशव फल लाएगा है |
केशव: फलानि आनेष्यति |
05. हम सब फ़िल्म देखेंगे |
वयं चलचित्रं द्रक्ष्याम: |
06. तुम दोनों गीत गाओगे |
युवां गीतं गाष्यथ: |
07. मैं पढ़ाई करूँगा |
अहं अध्ययनं करिष्यामि |
08. हम दोनों पुस्तक पढ़ेंगे |
आवां पुस्तकं पठिष्याव: |
09. बालक विद्यालय जाएगा |
बालकः विद्यालयं गमिष्यति |
10. बालक विद्यालय जाएंगे |
बालका: विद्यालयं गमिष्यन्ति |
( यहां पर कर्ता को देखने पर ज्ञात होता है कि कर्ता में एकवचन है लेकिन क्रिया को देखने पर ज्ञात होता है कि यह वाक्य तो बहुवचन का है )
11. कविता खेल खलेगी |
कविता क्रीडां खेलिष्यति |
12. हम सब फिल्म देखने के लिये जाएंगे |
वयं चलचित्रं द्रष्टुम् गमिष्यामः |
13. माता और पिता फल लाएंगे |
माता पिता च फलानि आनेष्यतः |
14. पेड़ से पत्ते गिरेंगे |
वृक्षात् पत्राणि पतिष्यन्ति |
15. बालिकाओं में प्रियंका होशियार होगी |
बालिकासु प्रियंका चतुरतमा भविष्यति |
16. तुम सब लेख लिखोगे |
यूयं लेखं लेखिष्यथ |
17. वह यहां से बस के द्वारा जयपुर जाएगा |
स: इत: बसयानेन जयपुरम् गमिष्यति |
18. अध्यापिका चॉक से लिखेगी |
अध्यापिका सुधाखंडेन लेखिष्यति |
19. छात्र किताब से पढेंगे |
छात्रा: पुस्तकेन पठिष्यन्ति |
20. पिता पुत्र के साथ बाजार जाएंगे |
पिता पुत्रेण सह आपणं गमिष्यति |
इस प्रकार से हम लृट् लकार ( future tence ) में हिंदी से संस्कृत में अनुवाद कर सकते हैं |
विभक्ति एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा क: कौ के
द्वितीया कम् कौ कान्
तृतीया केन काभ्याम् कै:
चतुर्थी कस्मै काभ्याम् केभ्य:
पञ्चमी कस्मात् काभ्याम् केभ्य:
षष्ठी कस्य कयो: केषाम्
सप्तमी कस्मिन् कयो: केषु
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विभक्ति एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा का के का:
द्वितीया काम् के का:
तृतीया कया काभ्याम् काभि:
चतुर्थी कस्यै काभ्याम् काभ्य:
पञ्चमी कस्या: काभ्याम् काभ्य:
षष्ठी कस्या: कयो: कासाम्
सप्तमी कस्याम् कयो: कासु
विभक्ति एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा किम् के कानि
द्वितीया किम् के कानि
तृतीया केन काभ्याम् कै:
चतुर्थी कस्मै काभ्याम् केभ्य:
पञ्चमी कस्मात् काभ्याम् केभ्य:
षष्ठी कस्य कयो: केषाम्
सप्तमी कस्मिन् कयो: केषु
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम ददाति दत्त: ददति
मध्यम ददासि दत्थ: दत्थ
उत्तम ददामि दद्व: दद्म:
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अददात् अदत्ताम् अददु:
मध्यम अददा: अदत्तम् अदत्त
उत्तम अददाम् अदद्व अदद्म
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम दास्यति दास्यत: दास्यन्ति
मध्यम दास्यसि दास्यथ: दास्यथ
उत्तम दास्यामि दास्याव: दास्याम:
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम ददातु दत्ताम् ददतु
मध्यम देहि दत्तम् दत्त
उत्तम ददानि ददाव ददाम
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम दद्यात् दद्याताम् दद्यु:
मध्यम दद्या: दद्यातम् दद्यात
उत्तम दद्याम् दद्याव दद्याम
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम गच्छति गच्छत: गच्छन्ति
मध्यम गच्छसि गच्छथ: गच्छथ
उत्तम गच्छामि गच्छाव: गच्छाम:
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अगच्छत् अगच्छताम् अगच्छन्
मध्यम अगच्छ: अगच्छतम् अगच्छत
उत्तम अगच्छम् अगच्छाव अगच्छाम
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम गमिष्यति गमिष्यत: गमिष्यन्ति
मध्यम गमिष्यसि गमिष्यथ: गमिष्यथ
उत्तम गमिष्यामि गमिष्याव: गमिष्याम:
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम गच्छतु गच्छताम् गच्छन्तु
मध्यम गच्छ गच्छतम् गच्छत
उत्तम गच्छानि गच्छाव गच्छाम
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम गच्छेत् गच्छेताम् गच्छेयु:
मध्यम गच्छे: गच्छेतम् गच्छेत
उत्तम गच्छेयम् गच्छेव गच्छेम
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खादति खादत: खादन्ति
मध्यम खादसि खादथ: खादथ
उत्तम खादामि खादाव: खादाम:
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अखादत् अखादताम् अखादन्
मध्यम अखाद: अखादतम् अखादत
उत्तम अखादम् अखादाव अखादाम
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खादिष्यति खादिष्यत: खादिष्यन्ति
मध्यम खादिष्यसि खादिष्यथ: खादिष्यथ
उत्तम खादिष्यामि खादिष्याव: खादिष्याम:
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खादतु खादताम् खादन्तु
मध्यम खाद खादतम् खादत
उत्तम खादानि खादाव खादाम
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खादेत् खादेताम् खादेयु:
मध्यम खादे: खादेतम् खादेत
उत्तम खादेयम् खादेव खादेम
विद्या आधारित श्लोक संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हि...