Monday, 31 October 2022

हिंदी से संस्कृत में अनुवाद ( परीक्षोपयोगी )

 अनुवाद ( सभी लकारों मे ) परीक्षोपयोगी  

अधोलिखितानि वाक्यानि संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत  - ( CBSE - 2022 Class X ) 

01. लिपिक अपना कार्य करता है | 

       लिपिक: स्व कार्यं करोति | 

02. दो किसानों ने खेत जोता था | 

        द्वौ कृषकौ क्षेत्रं अकर्षत: | 

03. मैं आलस्य का त्याग करूँगा | 

       अहम् आलस्यस्य त्यागं करिष्यामि | 

04. तुम सब मिलकर गीत बोलो | 

       यूयं मिलित्वा गीतं गायथ | 

05. हमें रोज व्यायाम करना चाहिये | 

       वयं प्रतिदिनं व्यायामम् कुर्याम | 

06. सफलता परिश्रम का परिणाम है | 

       सफलता परिश्रमस्य परिणाम: अस्ति | 

07. कल मोहन कहाँ था | 

       ह्य: मोहन: कुत्र आसीत् | 

Compartment exam 2022 CLASS - IX 

01. यह मेरी पुस्तक है | 

       इदम् मम पुस्तकं अस्ति | 

02. बगीचे के चारों ओर सड़क है | 

       उपवनं परित: मार्ग: अस्ति | 

03. रवि पुस्तक पढ़ता है | 

       रवि: पुस्तकं पठति | 

04. भारत की राजधानी दिल्ली है | 

       भारतस्य  राजधानी दिल्ली अस्ति | 

05. तुम्हारा मोबाइल मेरे पास है | 

       तव चलदूरवाणी मम समीपे अस्ति | 

06. भारत की राजभाषा हिन्दी है | 

       भारतस्य राजभाषा हिन्दी अस्ति | 

    Mid - Term exam 2022-23 Class - X 

01. चिकित्सालय के चारों मार्ग हैं | 

       चिकित्सालयस्य परित: मार्गा: सन्ति | 

02. तुम माँ के साथ रसोई में काम करती हो | 

       त्वं मात्रा सह पाकशालायां कार्यं करोषि | 

03. राधा ने भोजन किया | 

       राधा भोजनम् अकरोत् | 

04. कल गणतन्त्र दिवस था | 

       ह्य:  गणतन्त्रदिवस: असीत् | 

05. यमुना नदी दिल्ली में बहती है | 

       यमुना नदी देहल्यां प्रवहति | 

06. सदा सच बोलो | 

       सर्वदा सत्यं वद | 

Saturday, 22 October 2022

वाच्य परिवर्तनम् ( भाग -2) CBSE आधारित

 वाच्य परिवर्तनम् ( भाग -2 ) 

अधोलिखितेषु संवादेषु रिक्तस्थानानि वाच्यानुसारं उचितै: पदै: पूरयत् - 

   01.                   [ CBSE 2014 ]

शिक्षक: - अमन ! गत्वा पश्य ...............किं कुर्वन्ति ? 

अमन: - छात्रै: तु ....................लिख्यन्ते | 

शिक्षक: - किं त्वं लेखं .....................? 

अमन: - आम् ! ..............अपि लेख: लिख्यते | 

शिक्षक: - सुरेश: न दृश्यते | स: कुत्र ? 

अमन: - सुरेश: स्वस्थ: न अस्ति , अतः विद्यालय-चिकित्सा-कक्षे तेन ...............क्रियते | 

शिक्षक: - अस्तु , स: विश्रामम् करोति | समीचीनम् | 

    02.                         CBSE - 2016 

अध्यापिका - अनु ! किम् त्वं पाठं ...............? 

अनु - आम् , मया ......................स्मर्यते | 

अध्यापिका - तर्हि किमर्थं ...................सम्यग् उत्तरं न दीयते | 

अनु - जानामि ..................| अनभ्यासादेव | 

अध्यापिका - किं त्वया पुनरावृत्ति: ................? 

अनु - आम् , अहं पुनरावृत्तिम् करोमि | 


Click and see


   03.               CBSE - 2014 

देवांश: - मित्र ! त्वं कुत्र ( i ).............? 

हृदय: - मित्र ! ( ii ) .......... तु पुस्तकालयं गम्यते | 

देवांश: - ( iii ).........अपि त्वया सह चलामि | 

हृदय: - आगच्छ ! शीघ्रं एव आवां चलाव: |

देवांश: - आम् ! त्वया कीदृशम् पुस्तकं ( iv ) ..........| 

हृदय: - मया ज्ञानवर्धनं ( v ) ........... पठ्यते | 

देवांश: - शोभनम् | त्वमपि शोभनं बाल: अस्ति | 


   04.                   [ CBSE - 2016 ] 

श्याम: - सोहन ! किम् ....................मया सह पत्रालयं गच्छसि ? 

सोहन: - नहि , मया तु पत्रालयं न ................| अहं तु पाठं स्मरामि | 

श्याम: - शोभनम् | इदानीं त्वया ................स्मर्यते ! तदनन्तरं त्वं किं करोषि ? 

सोहन: - तत्पश्चात् माया गणितस्य अभ्यास: ............| 

श्याम: - अस्तु , ..................तु पत्रालयम् एव गम्यते | 


01. उत्तराणि :- 01. छात्रा: , 02. लेखा: , 03. लिखसि , 04. मया  

02. उत्तराणि :- 01. स्मरसि , 02. पाठ: , 03. त्वया , 04. अहम् , 05. क्रियते                  

03.उत्तराणि :- 01. गच्छसि  , 02. मया , 03. अहम्  , 04. पठ्यते , 05. पुस्तकं 

04. उत्तराणि :- 01. त्वं , 02. गम्यते , 03. पाठ: ,04. क्रियते , 05. मया 


Wednesday, 19 October 2022

वाच्यपरिवर्तनम् लट् लकारे ( active voice to passive voice )

  वाच्य परिवर्तनम् ( लट् लकार में )  

वाच्य को english में voice कहते हैं | वाच्य तीन प्रकार का होते है :- 

01. कर्तृवाच्य ( Active voice ) 

02. कर्मवाच्य (Passive voice )  

03. भाववाच्य ( Impersonal voice )   

01. कर्तृवाच्य :- इसमे कर्ता की प्रधानता होती है | कर्ता के अनुसार क्रिया के पुरुष , वचन , लिंग , एवं विभक्ति में परिवर्तन होता है | 

विशेष:- कर्ता में प्रथमा विभक्ति कर्म में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है | 

02. कर्मवाच्य :- इसमे कर्म की प्रधानता होती है | कर्म के अनुसार क्रिया के पुरुष , वचन , लिंग , एवं विभक्ति में परिवर्तन होता है | 

विशेष:- कर्ता में तृतीया विभक्ति कर्म में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है | 

03. भाववाच्य :- इसमे भाव प्रधान होता है | क्रिया हमेशा नपुंसकलिंग एकवचन या प्रथम पुरुष एकवचन में ही होती है | 


Video देखकर भी समझ सकते हैं एक बार क्लिक करें 


वाच्य परिवर्तनम् कुरुत :-  [ CBSE 2014 ]

देवांश: - मित्र ! त्वं कुत्र ( i ).............? 

हृदय: - मित्र ! ( ii ) .......... तु पुस्तकालयं गम्यते | 

देवांश: - ( iii ).........अपि त्वया सह चलामि | 

हृदय: - आगच्छ ! शीघ्रं एव आवां चलाव: |

देवांश: - आम् ! त्वया कीदृशम् पुस्तकं ( iv ) ..........| 

हृदय: - मया ज्ञानवर्धनं ( v ) ........... पठ्यते | 

देवांश: - शोभनम् | त्वमपि शोभनं बाल: अस्ति | 


उत्तराणि :- 01. गच्छसि  , 02. मया , 03. अहम्  , 04. पठ्यते , 05. पुस्तकं 

 

 कर्तृवाच्य :- बालकः विद्यालयं गच्छति | 

 कर्मवाच्य :- बालकेन विद्यालय: गम्यते |


कर्तृवाच्य :- बालका: विद्यालयं गच्छन्ति | 

कर्मवाच्य :- बालकै: विद्यालय: गम्यते | 


कर्तृवाच्य :- अशोक: क्रीडां करोति |  

कर्मवाच्य :- अशोकेन क्रीडा क्रियते | 


कर्तृवाच्य :- वयं चलचित्रं द्रष्टुम् गच्छामः |  

कर्मवाच्य :- अस्माभि: चलचित्रं द्रष्टुं गम्यते | 


कर्तृवाच्य :- माता पिता च फलानि आनयतः | 

कर्मवाच्य :- मातृ-पितृभ्याम् फलानि आनीयन्ते | 


कर्तृवाच्य :- यूयं लेखं लिखथ | 

कर्मवाच्य :-  युष्माभि: लेख: लिख्यते | 


कर्तृवाच्य :- स: इत: बसयानेन जयपुरम् गच्छति | 

कर्मवाच्य :-  तेन इत: बसयानेन जयपुरं गम्यते | 


कर्तृवाच्य :- अध्यापिका सुधाखंडेन उत्तरं लिखति | 

कर्मवाच्य :- अध्यापिकया सुधाखंडेन उत्तरं लिख्यते | 


कर्तृवाच्य :- पिता पुत्रेण सह आपणं गच्छति |

कर्मवाच्य :- पित्रा पुत्रेण सह आपणं गम्यते | 


Monday, 17 October 2022

अशुद्धि संशोधनम् भाग -2 ( पुरुष अनुसार )

  वाक्य संशोधनम् भाग - 2 ( पुरुष अनुसार )   

(नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर अंत मे दिए गए है )

कर्ता और क्रिया का निर्धारण पुरुष के अनुसार किया जाता है | यदि प्रथम पुरुष का कर्ता है तो क्रिया भी प्रथम पुरुष की होगी | इसी तरह मध्यम पुरुष के कर्ता के साथ मध्यम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा और  उत्तम पुरुष के कर्ता के साथ उत्तम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा | 

अधोलिखितवाक्येषु रेखांकित पदेषु काश्चन अशुद्धय: सन्ति , तेषां शुद्धरूपं विकल्पेभ्य: चित्वा लिखत - 

01. आवां न चलथ: | [ Delhi 2011 ]

    (अ) तौ  (ब) युवां  (स) यूयं  (द) ता:  

02. ता: पाठं पठसि | [ All India 2011 ] 

    (अ) पठत:  (ब) पठथ:  (स) पठन्ति  (द) पठथ 

03. ता: समाचारपत्रं पठसि । [ All India 2012 ]

    (अ) पठत:  (ब) पठथ:  (स) पठन्ति  (द) पठथ 

04. त्वं कदा नाटकं द्रक्ष्यन्ति ? [ All India 2012 ,16 ] 

    (अ)  द्रक्ष्यामि  (ब) द्रक्ष्यसि  (स) पश्याव:  (द) पश्यथ: 

05. त्वं मम मित्रं अस्ति | [ Delhi 2013 ]

    (अ) भवति  (ब) अस्मि  (स) स्त:  (द) असि 

06. वयं सर्वे प्रातः उद्यानं गच्छन्ति | [ Delhi 2013 ]

    (अ) गच्छाव:  (ब) गच्छाम:  (स) गच्छथ:  (द)गमिष्यामि 

07. त्वं पाठं अपठत् | [ Delhi 2014 ]

    (अ) अपठताम्  (ब) अपठ:  (स) अपठतम्  (द) अपठत 

08. अहं नाटकं द्रक्ष्यन्ति  [ Delhi 2014 ]

    (अ)  द्रक्ष्यामि  (ब) द्रक्ष्यसि  (स) पश्याव:  (द) पश्यथ: 

09. मम समीपे पञ्च फलानि स्थ | [ All India 2014 ] 

    (अ) अस्ति  (ब) असि  (स) सन्ति  (द) स्म: 

10. वानरा: अकूर्द: | [ Delhi 2015 ]

    (अ) अकूर्दत्  (ब) अकूर्दताम्  (स) अकूर्दन्  (द) अकूर्दत 

11. अहं सेवफलं खादति | [ Delhi 2015 ] 

    (अ) आवाम्  (ब) वयम्  (स) त्वम्  (द) सः 

12. यूयं व्यर्थं न वदाव: | [ All India 2015 ]

    (अ) वदथ:  (ब) वदथ  (स) वदन्ति  (द) वदाम: 

13. आवां अस्माकं मित्रै: सह गमिष्यत: | [ All India 2015 ] 

    (अ) युवाम्  (ब) यूयम्  (स) त्वम्  (द) तौ 

14. अहं गीतां पठिष्याम: | [ Delhi 2016 ]

    (अ) पठिष्यामि  (ब) पठिष्यति  (स) पठिष्याव:  (द) पठिष्यथ 

15. ते तत्र भोजनं अकुर्व: |  [ Delhi 2016 ]            (अ) अकरोत्  (ब) अकरो:  (स) अकुर्वन्   (द) अकुरुताम्  


उत्तराणि :- 01. ब , 02. स , 03. स , 04. ब , 05. द , 06. ब , 07. ब , 08. अ , 09. स , 10. स , 11. द , 12. ब , 13. द , 14. अ , 15. स |  

Wednesday, 12 October 2022

अशुद्धि संशोधन ( वचनानुसार )

 वाक्य संशोधन ( वचन अनुसार ) 

वाक्य संशोधन करते समय छात्रों को एक बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिये कि क्रिया ( verb ) का अलग - अलग लिंग न होकर केवल एक ही लिंग होता है , परन्तु कर्ता व कर्म का लिंग एवं विभक्ति अलग - अलग होते हैं

वचन अनुसार वाक्य संशोधनम् :- इस प्रकार के वाक्य शुद्धि करते समय ध्यान रखे कि कर्ता और क्रिया का वचन एक ही होता है अर्थात यदि कर्ता में एकवचन है हो क्रिया में भी एकवचन ही होगा | इसी तरह द्विवचन और बहुवचन को समझना चाहिए | 
  
(इन प्रश्नों के उत्तर सबसे अंत मे मिलेंगे )

अधोलिखित वाक्येषु रक्तवर्णीयपदेषु काश्चन अशुद्धय: सन्ति , तेषां शुद्धरूपं विकल्पेभ्य: चित्वा लिखत - 

01. तौ तत्र किमर्थं गच्छन्ति ? [ Delhi 2011 ]

  (अ)  गच्छति   (ब) गच्छत:   (स) गच्छथ:   (द) गच्छसि 

02. यूयं कुत्र उपविशसि ? [ All India 2011] 

  (अ) उपविशथ (ब) उपविशथ: (स) उपविशन्ति (द) उपविशाम: 

03. मम समीपे द्वादश पुस्तक: सन्ति | [ Delhi 2013 , All India 2013 ] 

  (अ) पुस्तके  (ब) पुस्तका:  (स) पुस्तकानि  (द) पुस्तकेषु 

04. सर्वेषां दीनजनस्य सेवां करोतु | [ Delhi 2013 ] 

  (अ) दीनजनयो: (ब)  दीनजनानाम्  (स)  दीनजनेभ्यः (द)  दीनजनेन 

05. सा बालिका: क्रीडन्ति | [ All India 2013 ] 

  (अ) ते     (ब) ता:   (स) स:    (द) तानि 

06. एते सर्वे मम मित्रं सन्ति | [ Delhi 2014 ] 

  (अ) मित्राणि   (ब) मित्रा:   (स) मित्रे   (द) मित्र: 

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07. भवान् गृहम् गच्छन्तु | [ Delhi 2014 ] 

  (अ) भवन्तः  (ब) भवत्य:  (स) भवन्तम्  (द) भवता 

08. ता: बालिका रामायणं पठति | [ All India 2014] 

  (अ) ते   (ब) सः   (स) सा    (द) तानि 

09. भवान् सुखी भवन्तु | [ All India 2014 ]

 (अ) भवताम्    (ब) भवतु  (स) भव    (द) भवत 

10. यूयं गृहं गच्छथ: | [ Delhi 2015 ] 

  (अ) त्वम्    (ब) युवाम्    (स) तौ     (द) ते 

11. वानर: कुत्र न कूर्दन्ति ? [ Delhi 2015 ]

  (अ) कूर्दसि  (ब) कूर्दति  (स) कूर्दत:  (द) कूर्दिष्यन्ति 

12. द्वे छात्रे अत्र पठन्ति | [ All India 2015 ] 

  (अ) पठति  (ब) पठत:  (स) पठथ:  (द) पठथ 

13. गायिका: गीतानि गायति |  [ Delhi 2016 ]

  (अ) गास्यामि (ब) गायसि (स) अगायत् (द) गायन्ति 

14. त्वया सह के गच्छति

  (अ)  गच्छन्ति (ब) गच्छाम: (स) गच्छत: ( द) गच्छसि 

15. मया सह मम मित्रं अपि गच्छन्ति | 

  (अ)  मित्राणि  (ब) मित्रे  (स) मित्रा:  (द) मित्रान् 

16. ता: अत्र फलं खादतः |

  (अ) ते       (ब) त्वम्    (स) स:     (द) युवाम् 

17. मया सह ते अपि  गच्छति

  (अ) गच्छसि  ( ब) गच्छन्ति (स) गच्छथ  (द) गच्छाम 

18. त्वया सह तव पिता अपि गच्छन्ति

  (अ) गच्छति  (ब) अगच्छत्  (स) आगच्छत  (द) गच्छत: 

19. केचन जन: तत्र व्यायामम् अपि कुर्वन्ति | 

  (अ) जनान्  (ब) जनै:   (स) जना:   (द) जनम् 

20. भवान् निर्धनेभ्य: धनं यच्छन्तु

  (अ)  यच्छत  (ब) यच्छतं  (स) यच्छतु   (द) यच्छ 

21. येन जना: शिक्षित: भवेयु: | 

  (अ)  शिक्षितान्  (ब) शिक्षिता:  (स)  शिक्षितम्  (द) शिक्षितानि 

22. रामः बहूनां दिनानां सहायतां कुर्वन्ति स्म | 

  (अ) करोषि  (ब) करोमि  (स) करोति  (द) कुर्म: 

23. भवान् कुत्र गच्छन्ति

  (अ) गच्छति   (ब) गच्छसि   (स) गच्छथ   (द) गच्छामि 

24. बाला: बालै: सह क्रीडत:

  (अ) क्रीडति  (ब) क्रीडन्ति  (स) क्रीडतै:  (द) क्रीडनकानि 

25. इमे वस्त्राणि मलिनानि सन्ति | 

  (अ) इमानि  (ब) इदम्  (स) अयम्    (द) इमौ 

उत्तराणि :- 01. ब , 02. अ , 03. स , 04. ब , 05. ब , 06. अ , 07. अ , 08. स , 09. ब , 10. ब , 11. ब , 12. ब , 13. द , 14. अ , 15. अ , 16. अ , 17.ब , 18. अ , 19. स , 20. स , 21.ब , 22. स , 23. अ , 24. ब , 25. अ 


Sunday, 9 October 2022

Future tence में हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद

 हिंदी से संस्कृत में अनुवाद ( future tence ) लृट् लकार में 

 लृट् लकार को English में future tence और हिंदी में भविष्यत् काल कहते हैं | 

भविष्यत्  काल की पहचान है :- गा , गे , गी |

01. मैं अपने मित्र को पत्र लिखूंगा |

       अहं स्व मित्रं पत्रं लेखिष्यामि | 

02. तुम विद्यालय कब जाओगी  |

       त्वं विद्यालयं कदा गमिष्यसि | 

03.  बालक बाजार से पुस्तक लाएगा |

        बालकः आपणात् पुस्तकं आनेष्यति | 

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे :- 

04. केशव फल लाएगा है |

       केशव: फलानि  आनेष्यति | 

05. हम सब फ़िल्म देखेंगे |

       वयं चलचित्रं द्रक्ष्याम: | 

06. तुम दोनों गीत गाओगे |

       युवां गीतं गाष्यथ: | 

07. मैं पढ़ाई करूँगा |

      अहं अध्ययनं करिष्यामि | 

08. हम दोनों पुस्तक पढ़ेंगे |

      आवां पुस्तकं पठिष्याव: | 

09. बालक विद्यालय जाएगा | 

       बालकः विद्यालयं गमिष्यति | 

10. बालक विद्यालय जाएंगे | 

       बालका: विद्यालयं गमिष्यन्ति | 

( यहां पर कर्ता को देखने पर ज्ञात होता है कि कर्ता में एकवचन है लेकिन क्रिया को देखने पर ज्ञात होता है कि यह वाक्य तो बहुवचन का है )

11. कविता खेल खलेगी | 

       कविता क्रीडां खेलिष्यति | 

12. हम सब फिल्म देखने के लिये जाएंगे | 

       वयं चलचित्रं द्रष्टुम् गमिष्यामः | 

13. माता और पिता फल लाएंगे | 

       माता पिता च फलानि आनेष्यतः | 

14. पेड़ से पत्ते  गिरेंगे | 

       वृक्षात् पत्राणि पतिष्यन्ति | 

15. बालिकाओं में प्रियंका होशियार होगी | 

       बालिकासु  प्रियंका चतुरतमा भविष्यति | 

16. तुम सब लेख लिखोगे | 

       यूयं लेखं लेखिष्यथ | 

17. वह यहां से बस के द्वारा जयपुर जाएगा | 

       स: इत: बसयानेन जयपुरम् गमिष्यति | 

18. अध्यापिका चॉक से लिखेगी | 

       अध्यापिका सुधाखंडेन लेखिष्यति | 

19. छात्र किताब से पढेंगे |

       छात्रा: पुस्तकेन पठिष्यन्ति | 

20. पिता पुत्र के साथ बाजार जाएंगे | 

       पिता पुत्रेण सह आपणं गमिष्यति |

इस प्रकार से हम लृट् लकार ( future tence ) में हिंदी से संस्कृत में अनुवाद कर सकते हैं | 


Saturday, 8 October 2022

किम् शब्द के शब्द रूप ( तीनों लिंगों में )

            किम् शब्द रूप 

             किम् ( कौन ) पुल्लिंग 

विभक्ति  एकवचनम्  द्विवचनम्  बहुवचनम् 

प्रथमा         क:             कौ             के 

द्वितीया       कम्            कौ            कान् 

तृतीया         केन           काभ्याम्      कै: 

चतुर्थी         कस्मै          काभ्याम्      केभ्य: 

पञ्चमी       कस्मात्       काभ्याम्      केभ्य:

षष्ठी            कस्य          कयो:         केषाम् 

सप्तमी        कस्मिन्      कयो:         केषु  

Video के माध्यम से समझने के लिए क्लिक करें 

             किम् ( कौन ) स्त्रीलिंग  

विभक्ति  एकवचनम्  द्विवचनम्  बहुवचनम् 

प्रथमा         का             के              का: 

द्वितीया       काम्          के              का: 

तृतीया         कया          काभ्याम्      काभि: 

चतुर्थी         कस्यै          काभ्याम्      काभ्य: 

पञ्चमी       कस्या:        काभ्याम्      काभ्य:

षष्ठी            कस्या:        कयो:         कासाम् 

सप्तमी        कस्याम्       कयो:         कासु 

            किम् ( कौन ) नपुंसकलिंग  

विभक्ति  एकवचनम्  द्विवचनम्  बहुवचनम् 

प्रथमा         किम्           के              कानि 

द्वितीया       किम्           के              कानि

तृतीया        केन             काभ्याम्      कै: 

चतुर्थी         कस्मै           काभ्याम्     केभ्य: 

पञ्चमी       कस्मात्        काभ्याम्     केभ्य:

षष्ठी            कस्य            कयो:        केषाम् 

सप्तमी        कस्मिन्        कयो:         केषु 


Friday, 7 October 2022

दा धातु ( पांचों लकारों में )

  धातु रूप " दा  ( देना ) 

लट् लकार ( वर्तमान काल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम     ददाति         दत्त:        ददति  

मध्यम    ददासि        दत्थ:       दत्थ 

उत्तम     ददामि         दद्व:        दद्म: 

लङ् लकार ( भूतकाल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन      बहुवचन 

प्रथम    अददात्       अदत्ताम्    अददु: 

मध्यम   अददा:        अदत्तम्     अदत्त

उत्तम    अददाम्       अदद्व        अदद्म 


वीडियो के लिए क्लिक करे 


लृट् लकार ( भविष्यत काल ) 

पुरुष    एकवचन      द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     दास्यति      दास्यत:      दास्यन्ति  

मध्यम    दास्यसि     दास्यथ:      दास्यथ 

उत्तम      दास्यामि    दास्याव:     दास्याम: 

लोट् लकार ( आज्ञार्थ काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     ददातु         दत्ताम्       ददतु  

मध्यम    देहि           दत्तम्        दत्त 

उत्तम      ददानि       ददाव        ददाम 

विधिलिंग लकार ( चाहिये अर्थ ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम    दद्यात्       दद्याताम्     दद्यु: 

मध्यम   दद्या:        दद्यातम्      दद्यात 

उत्तम     दद्याम्      दद्याव         दद्याम 


गम् धातु रूप पांचों लकारों में

  धातु रूप " गम्   (जाना ) गच्छ  

लट् लकार ( वर्तमान काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम    गच्छति        गच्छत:     गच्छन्ति 

मध्यम   गच्छसि       गच्छथ:     गच्छथ 

उत्तम    गच्छामि       गच्छाव:    गच्छाम: 


click kro sample paper milega :-


लङ् लकार ( भूतकाल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन      बहुवचन 

प्रथम   अगच्छत्      अगच्छताम्   अगच्छन् 

मध्यम  अगच्छ:       अगच्छतम्   अगच्छत 

उत्तम   अगच्छम्      अगच्छाव     अगच्छाम 

लृट् लकार ( भविष्यत काल ) 

पुरुष    एकवचन      द्विवचन       बहुवचन 

प्रथम    गमिष्यति   गमिष्यत:   गमिष्यन्ति  

मध्यम   गमिष्यसि  गमिष्यथ:   गमिष्यथ 

उत्तम    गमिष्यामि  गमिष्याव:  गमिष्याम: 

लोट् लकार ( आज्ञार्थ काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     गच्छतु      गच्छताम्     गच्छन्तु  

मध्यम    गच्छ        गच्छतम्      गच्छत 

उत्तम     गच्छानि    गच्छाव       गच्छाम 

विधिलिंग लकार ( चाहिये अर्थ ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम    गच्छेत्       गच्छेताम्     गच्छेयु: 

मध्यम   गच्छे:        गच्छेतम्      गच्छेत 

उत्तम     गच्छेयम्    गच्छेव        गच्छेम 


खाद् धातु रूप (पांचों लकारों में)

  धातु रूप " खाद्  (खाना , भक्षणे ) 

लट् लकार ( वर्तमान काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम    खादति        खादत:     खादन्ति 

मध्यम   खादसि       खादथ:     खादथ 

उत्तम    खादामि       खादाव:    खादाम: 

लङ् लकार ( भूतकाल ) 

पुरुष    एकवचन     द्विवचन      बहुवचन 

प्रथम   अखादत्      अखादताम्   अखादन् 

मध्यम  अखाद:       अखादतम्   अखादत 

उत्तम   अखादम्      अखादाव     अखादाम 

लृट् लकार ( भविष्यत काल ) 

पुरुष    एकवचन      द्विवचन       बहुवचन 

प्रथम    खादिष्यति   खादिष्यत:   खादिष्यन्ति  

मध्यम   खादिष्यसि  खादिष्यथ:   खादिष्यथ 

उत्तम    खादिष्यामि  खादिष्याव:  खादिष्याम: 

लोट् लकार ( आज्ञार्थ काल ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन     बहुवचन 

प्रथम     खादतु      खादताम्     खादन्तु  

मध्यम    खाद        खादतम्      खादत 

उत्तम     खादानि    खादाव       खादाम 

विधिलिंग लकार ( चाहिये अर्थ ) 

पुरुष    एकवचन    द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम    खादेत्       खादेताम्     खादेयु: 

मध्यम   खादे:        खादेतम्      खादेत 

उत्तम     खादेयम्    खादेव        खादेम 

Thursday, 6 October 2022

पठ् धातु रूप ( पांचों लकारों में )

 धातु रूप " पठ् (पढ़ना ) 

लट् लकार ( वर्तमान काल ) 

पुरुष    एकवचन   द्विवचन   बहुवचन 

प्रथम    पठति        पठत:     पठन्ति 

मध्यम   पठसि       पठथ:     पठथ 

उत्तम    पठामि       पठाव:    पठाम: 

लङ् लकार ( भूतकाल ) 

पुरुष    एकवचन   द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम   अपठत्      अपठताम्  अपठन् 

मध्यम  अपठ:       अपठतम्  अपठत 

उत्तम   अपठम्      अपठाव    अपठाम 

लृट् लकार ( भविष्यत काल ) 

पुरुष    एकवचन   द्विवचन      बहुवचन 

प्रथम    पठिष्यति   पठिष्यत:   पठिष्यन्ति  

मध्यम   पठिष्यसि  पठिष्यथ:   पठिष्यथ 

उत्तम    पठिष्यामि  पठिष्याव:  पठिष्याम: 

लोट् लकार ( आज्ञार्थ काल ) 

पुरुष    एकवचन  द्विवचन    बहुवचन 

प्रथम     पठतु      पठताम्     पठन्तु  

मध्यम    पठ        पठतम्      पठत 

उत्तम     पठानि    पठाव       पठाम 

विधिलिंग लकार ( चाहिये अर्थ ) 

पुरुष    एकवचन   द्विवचन   बहुवचन 

प्रथम    पठेत्       पठेताम्     पठेयु: 

मध्यम   पठे:        पठेतम्      पठेत 

उत्तम     पठेयम्    पठेव        पठेम 

यण् सन्धि

  यण् सन्धि 

परिभाषा :- यदि हृस्व / दीर्घ इ , उ , ऋ , लृ के पश्चात कोई विजातीय स्वर हो तो हृस्व / दीर्घ इ , उ , ऋ , लृ के स्थान पर क्रमशः य् , व् , र् , ल्  आदेश होगा | 

विशेष :- यहाँ पर पूर्व वर्ण के बाद सजातीय वर्ण नहीं होना चाहिये यदि सजातीय होगा तो दीर्घ सन्धि हो जाएगी | अर्थात् " इ " के बाद कोई भी " इ " नहीं होना चाहिये और इसी तरह " उ " के बाद एंव " ऋ " के बाद उसी जाति का स्वर नहीं होना चाहिए | 

** इस संधि में पूर्व पद  के अन्तिम स्वर के स्थान पर ही परिवर्तन होगा | 

उदाहरण :- 

यदि   + अपि          = यद्यपि 

इति   + आदि          = इत्यादि 

अपि  + एवम्          = अप्येवम् 

इति   + अपि           = इत्यपि 

अति  + आवश्यकम् =  अत्यावश्यकम् 

प्रति   + एकम्         = प्रत्येकम् 

प्रति   + आगच्छति  = प्रत्यागच्छति 

इति   + आह           = इत्याह 

नदी   + अत्र           = नद्यत्र 

सुधी  + उपास्य       = सुद्युपास्य 

देवी   + अपि          = देव्यपि 

यहाँ क्लिक करो वीडियो के द्वारा समझाया गया है :-  

सु      + आगतम्     = स्वागतम् 

मधु    + अरि:         = मध्वरि: 

अनु   + अय:          = अन्वय: 

वधू    + आज्ञा        = वध्वाज्ञा 

वधू    + आदेश:      = वध्वादेश: 

अनु   + अर्थ:          = अन्वर्थ: 

वधू    + आगमनम्  = वधवागमनम्  

धेनु    + ऐक्यम्       = धेन्वैक्यम् 

तनु    + अंगी          = तन्वंगी 

पितृ   + आज्ञा        = पित्राज्ञा 

मातृ   + आदेश:     = मात्रादेश: 

भ्रातृ   + आज्ञा       = भ्रात्राज्ञा 

मातृ   + आ           = मात्रा 

पितृ   + आदेश:     = पित्रादेश: 

पितृ   + अर्थम्       = पित्रर्थम्  

लृ      + आकृति:   = लाकृति: 

लृ      + अनुदेश:    = लानुदेश: 

लृ      + आदेश:     = लादेश: 

लृ      + आकार:    = लाकार: 

 

वृद्धि सन्धि:

 वृद्धि सन्धि 

परिभाषा :- यदि " अ / आ " के पश्चात् " ए / ऐ " और " ओ /औ " हो तो पूर्व - पर वर्णों के स्थान पर क्रमशः " ऐ " और " औ " आदेश होगा | 

सूत्र :- वृद्धिरेचि | 

अ / आ + ए / ऐ     = ऐ 

अ / आ + ओ / औ = औ 

उदाहरण :- 

अत्र +एक:        =  अत्रैक: 

पश्य + एतत्      =  पश्यैतत् 

सा + ऐषा          =  सैषा 

राज + एश्वर्यम्    =  राजैश्वर्यम् 

तंदुल + ओदनम् =  तण्डुलौदनम् 

महा + औषधि:   =  महौषधि: 

देव + ओदार्यम्   =  देवौदार्यम् 

एक + एक         =  एकैक: 

सदा + एव         =  सदैव: 

कृष्ण + एकत्वम् =  कृष्णैकत्वम् 

देव + ऐश्वर्यम्     =  देवैश्वर्यम् 

महा +ऐश्वर्यम्     =  महैश्वर्यम् 

गंगा + ओघ:      =  गंगौघ: 

न + ऐतत्           =  नैतत् 

मत + ऐक्य:       =  मतैक्य: 

तदा + एव          =  तदैव: 

अद्य + एव          =  अद्यैव 

जन + एकता      =  जनैकता 

तत्र + एकता       =  तत्रैकता 

मम + औषधि:    =  ममौषधि: 

तव + ओष्ठ:        =  तवौष्ठम् 

यथा + औचित्यम् = यथौचित्यम् 

Wednesday, 5 October 2022

गुण सन्धि:

 गुण सन्धि 

परिभाषा :- यदि " अ / आ " के पश्चात् हृस्व / दीर्घ " इ , उ , ऋ , लृ " हो तो पूर्व - पर वर्णों के स्थान पर क्रमशः " ए , ओ , अर् , अल् " आदेश होता है | ( अर्थात्  ए , ओ , अर् , अल् को गुण कहा जाता है )

सूत्र : " आद् गुण: " |

अ /आ   +  इ / ई     =  ए 
अ / आ  +  उ / ऊ    =  ओ 
अ / आ  +  ऋ / ॠ  =  अर् 
अ / आ  +  लृ           =  अल् 

उदाहरण :-  

रमा   +  ईश: =     रमेश: ( अ + ई = ए ) 

गंगा  +  उदकम् =  गंगोदकम् ( आ + उ = ओ ) 

हित  +  उपदेश: = हितोपदेश: ( अ + उ = ओ ) 

महा  +  ऋषि =     महर्षि:  ( आ + ऋ = अर् ) 

तव   +  लृकार: =  तवल्कार: ( अ + लृ = अल् ) 

यहाँ पर बहुत ही आसान तरीके से समझाया गया है एक बार क्लिक कीजिये :-

धन   +  इन्द्र:    =  धनेन्द्र: 

उप   +  इन्द्र:    =   उपेन्द्र: 

पुष्प  +  इन्द्र:    =  पुष्पेन्द्र: 

गज   +  इन्द्र:    =  गजेन्द्र: 

सुर    +  इन्द्र:    =  सुरेन्द्र: 

दिन   +  ईश:     =  दिनेश: 

राम   +  ईश्वर:    =  रामेश्वर: 

नर    +  ईश:      =  नरेश: 

सूर्य   +  उदय:    =  सूर्योदय: 

महा  +  उत्सव:  =  महोत्सव: 

महा  +  ऊर्मि:    =  महोर्मि: 

नव   +  ऊढा      =  नवोढ़ा 

पुरुष +  उत्तम:    =  पुरुषोत्तम: 

यथा  +  उक्तम्    =  यथोक्तम् 

चंद्र   +  उदय:     =  चन्द्रोदय: 

पर    +  उपकार: =  परोपकार: 

सप्त +  ऋषि:     =  सप्तर्षि: 

महा +  ऋषि:      =  महर्षि: 

देव  +  ऋषि:      =  देवर्षि: 

विशेष :- यहाँ पर " अ / आ + ऋ = अर् होता है प्रथम शब्द का अंतिम स्वर और अगले शब्द का पहला स्वर मिलकर '' अर् '' होता है तथा '' अर् '' का '' र् '' हलन्त होता है अतः '' र् '' अगले वर्ण के ऊपर चला जाता है |  

राजा  +  ऋषि:     = राजर्षि: 

ब्रह्म   +  ऋषि:     = ब्रह्मर्षि: 

वर्षा   +  ऋतु:      = वर्षर्तु: 

ग्रीष्म  +  ऋतु:     = ग्रीष्मर्तु: 

शीत   +  ऋतु:     = शीतर्तु: 

वसंत  +  ऋतु:     = वसन्तर्तु: 

महा    +  लृकार:  = महल्कार: 

माला  +  लृकार:  = मालल्कार: 

मम    +  लृकार:  = ममल्कार: 

नव    +  लृकार:  = नवल्कार: 

Tuesday, 4 October 2022

दीर्घ सन्धि:

 दीर्घ संधि 

परिभाषा :-  यदि पूर्व पदान्त हृस्व / दीर्घ अ , इ ,उ , ऋ , के पश्चात कोई सजातीय वर्ण हो तो पूर्व -पर वर्णों के स्थान पर क्रमशः आ , ई , ऊ , ऋ आदेश होगा | 

सूत्र :- अक: सवर्णे दीर्घ: |  

अ  +  अ = आ          इ + इ = ई 

अ  + आ = आ          इ + ई = ई 

आ +  अ = आ          ई + इ = ई 

आ + आ = आ          ई + ई = ई 


उ  + उ  = ऊ             ऋ + ऋ = ॠ

उ  + ऊ = ऊ             ऋ + ॠ = ॠ 

ऊ + उ  = ऊ             ॠ + ऋ = ॠ 

ऊ + ऊ = ऊ             ॠ + ॠ = ॠ 

उदाहरण :- 

हिम     + अंशु:     =   हिमांशु: 

परम    + आनंद:  = परमानन्द: 

शिक्षा   + अर्थी     = शिक्षार्थी 

दैत्य     + अरि:     = दैत्यारि: 

विद्या   + आलय:  = विद्यालय: 

दया     + आनन्द: = दयानन्द: 

सत्य    +  अर्थी     = सत्यार्थी 

न        +  अस्ति    = नास्ति 

हिम    + आलय:   = हिमालय: 

प्रधान + आचार्य:  = प्रधानाचार्य: 

श्री     +   ईश:      = श्रीश: 

कपि  +   ईश:      = कपीश: 

रवी    +   इन्द्र:     = रवीन्द्र: 

हरि    +   ईश:      = हरीश: 

गिरि   +  इन्द्र       = गिरीन्द्र: 

सति   +  ईश:       = सतीश: 

मुनि   +  इन्द्र:      = मुनीन्द्र: 

रजनी +  ईश:       = रजनीश: 

शची   +  इन्द्र:      = शचीन्द्र: 

विष्णु  +  उदय:     = विष्णूदय: 

गुरु     +  उपदेश:  = गुरूपदेश: 

वधू     +  उत्सव:   = वधूत्सव: 

लघु    +  उत्तरम्    = लघूत्तरम् 

साधु   +  इक्तम्     = साधूक्तम् 

सु       +  उक्ति:     = सूक्ति: 

भानू   +  उदय:     = भानूदय: 

पितृ    +  ऋकार:  = पितॄकार:

पितृ    +  ऋणम्    = पितॄणम् 

मातृ    +  ऋकार:  = मातॄकार: 

मातृ    +  ऋणम्   = मातॄणम् 

संधि की परिभाषा व भेद

                                                 सन्धि                                      

संधि शब्द की व्युत्पत्ति :-  " सम् " उपसर्ग पूर्वक " डुधाञ् " (धा ) धातु के " कि " (उपसर्गे धो: कि ) प्रत्यय का प्रयोग करने से  " संधि " शब्द की व्युत्पत्ति होती है | 

संधि की परिभाषा :- " वर्णसंधानं संधि: " | संधानम् = मेलनम् | अर्थात् दो वर्णो के मेल को संधि कहते है | 

महर्षि पाणिनि के अनुसार परिभाषा :- " पर: सन्निकर्ष: संहिता " अर्थात् वर्णों के अत्यन्त सामिप्यता को संधि कहते हैं | 


सामान्य परिभाषा :- दो वर्णो के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं | 

संधि के प्रकार :- संधि तीन प्रकार की होती है - 1. स्वर संधि ( अच् संधि ) , 2. व्यञ्जन संधि ( हल् संधि ) , 3. विसर्ग संधि | 

1. स्वर संधि 

परिभाषा :- दो स्वरों के मेल से उत्पन्न विकार को स्वर संधि कहते हैं | 

भेद :- स्वर संधि के मुख्यतया पांच भेद होते हैं तथा तीन अवान्तर भेद होते है :- 1. दीर्घ , 2. गुण , 3. वृद्धि , 4. यण् , 5. अयादि | इनके अलावा 6. पूर्वरूप , 7. पररूप , 8. प्रकृति भाव | 

2. व्यञ्जन संधि 

परिभाषा :- दो व्यंजनों के मेल से या एक व्यंजन और स्वर के मेल से उत्पन्न विकार को व्यंजन संधि कहते हैं | 

भेद :- व्यंजन संधि के कोई निश्चित भेदों की संख्या नहीं होती हैं :- श्चुत्व , ष्टुत्व , जशत्व , चर्त्व , अनुनासिक , पूर्वसवर्ण , परसवर्ण , अनुस्वार , ङमुडागम , तुगागम , छत्व इत्यादि | 

3. विसर्ग संधि 

परिभाषा :- स्वर या व्यंजन के प्रभाव से विसर्ग में जो परिवर्तन होता है तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं | 

भेद :- विसर्ग संधि के कोई निश्चित भेदों की संख्या नहीं होती हैं :- सत्व , रुत्व ,उत्व , विसर्ग लोप इत्यादि | 

                     सन्धि 

       __________|________________

      |                |                            |                                                              

 स्वर संधि           व्यञ्जन संधि          विसर्ग संधि 

1. दीर्घ               1. श्चुत्व                1. सत्व 

2. गुण                2. ष्टुत्व                2. रुत्व 

3. वृद्धि               3. जशत्व             3. उत्व 

4. यण्                4. चर्त्व                4. विसर्ग लोप   

5. अयादि            5. अनुनासिक 

6. पूर्वरूप           6. पूर्वसवर्ण 

7. पररूप           7. परसवर्ण 

8.प्रकृति भाव       8. अनुस्वार 

                         9. ङमुडागम 

                        10. तुगागम 

                        11. छत्व 


Monday, 3 October 2022

क्तवतु प्रत्यय

  क्तवतु प्रत्यय:

* क्तवतु प्रत्यय कृदंत प्रत्यय कहलाता है |

* क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल अर्थ में किया जाता है | 

* क्तवतु  प्रत्यय का प्रयोग सर्वदा कर्तृवाच्य में ही किया जाता है | 

* इस प्रत्यय में प्रारम्भिक '' क् '' और अंतिम '' उ '' का लोप होकर " तवत् " शेष रहता है | 

* इस प्रत्यय के रूप तीनों लिंगो में चलते है | ( भवत् के समान ) 

  Examples :- 

धातु     प्रत्यय        पुल्लिंग         स्त्रीलिंग     नपुंसकलिंग 

पठ्   +   क्तवतु  =   पठितवान्   पठितवती    पठितवत्  

स्ना   +   क्तवतु  =   स्नातवान्    स्नातवती     स्नातवत् 

पा     +   क्तवतु  =  पीतवान्      पीतवती       पीतवत् 

त्यज्  +   क्तवतु  =  त्यक्तवान्     त्यक्तवती     त्यक्तवत् 

शृ      +   क्तवतु  =  शीर्णवान्     शीर्णवती      शीर्णवत् 

छिद्   +   क्तवतु  =  छिन्नवान्     छिन्नवती      छिन्नवत् 

गम्    +   क्तवतु  = गतवान्        गतवती        गतवत् 

दृश्    +   क्तवतु  =  दृष्टवान्       दृष्टवती        दृष्वत् 

नी      +   क्तवतु  =  नीतवान्      नीतवती      नीतवत् 

हन्     +   क्तवतु  =  हतवान्       हतवती        हतवत् 

कृ      +   क्तवतु  =  कृतवान्       कृतवती      कृतवत् 

भाष्   +   क्तवतु  =  भाषितवान्  भाषितवती  भाषितवत् 

ताड्    +   क्तवतु  =  ताडितवान्   ताडितवती  ताडितवत् 

श्रु      +    क्तवतु  =  श्रुतवान्       श्रुतवती      श्रुतवत् 

वच्     +   क्तवतु  =  उक्तवान्       उक्तवती     उक्तवत् 

वद्      +   क्तवतु  =  उदितवान्    उदितवती   उदितवत् 

वस्     +   क्तवतु  =  उषितवान्    उषितवती   उषितवत् 

वह्      +   क्तवतु  =  ऊढवान्      ऊढवती      ऊढवत् 

स्था     +   क्तवतु  = स्थितवान्     स्थितवती   स्थितवत् 

 दा      +   क्तवतु  =  दत्तवान्       दत्तवती      दत्तवत् 

भू        +   क्तवतु  =  भूतवान्      भूतवती     भूतवत् 

रच्      +   क्तवतु  =  रचितवान्    रचितवती   रचितवत् 

रक्ष्      +   क्तवतु  =  रक्षितवान्    रक्षितवती  रक्षितवत् 


ठक् प्रत्यय , Thak pratyay

 ठक् प्रत्यय

* ठक् प्रत्यय तद्धित् प्रत्यय कहलाता है क्योंकि इसका प्रयोग शब्द के साथ किया जाता है | 

* इस प्रत्यय का प्रयोग भाववाचक संज्ञा और विशेषण के रूप में किया जाता है | 

* इस प्रत्यय का प्रयोग होते समय " ठक् " को " इक " हो जाता है | 

* इस प्रत्यय का प्रयोग होने पर शब्द के प्रारंभिक स्वर को वृद्धि आदेश होता है अर्थात् को , इ / ई / ए को , उ / ऊ / ओ को तथा को आर् आदेश हो जाता है | 

* इस प्रत्यय के रूप तीनो लिंगो में चलते है :- पुल्लिंग ( बालक की तरह ) , स्त्रीलिंग ( नदी की तरह ) , नपुंसकलिंग ( फल की तरह ) 

 भूत + ठक्  = भौतिक: ( पुल्लिंग ) भौतिकी ( स्त्रीलिंग )  भौतिकम् ( नपुंसकलिंग ) 

यहां पर समझाया गया है एक बार क्लिक करके देखो :-

उदाहरण :- 
शब्द           प्रत्यय

अस्ति     +  ठक्  =  आस्तिक  

भूत        +  ठक्  =  भौतिक 

वर्ष         +  ठक्  =  वार्षिक 

नगर       +  ठक्  =  नागरिक 

समाज    +  ठक्  =  सामाजिक 

इतिहास  +  ठक्  =  ऐतिहासिक 

उद्योग     +  ठक्  =  औद्योगिक 

दिन        +  ठक्  =  दैनिक 

धर्म         +  ठक्  =  धार्मिक 

सप्ताह    +  ठक्  =  साप्ताहिक 

दर्शन      +  ठक्  =  दार्शनिक 

अर्थ        +  ठक्  =  आर्थिक 

संस्कृत    +  ठक्  =  सांस्कृतिक 

मास        +  ठक्  =  मासिक 

लोक       +  ठक्  =  लौकिक 

पुराण      +  ठक्  =  पौराणिक 

व्यवहार   +  ठक्  =  व्यावहारिक 

प्रमाण     +  ठक्  =  प्रामाणिक 

प्रथम       +  ठक्  =  प्राथमिक 

वेद          +  ठक्  =  वैदिक 

कृति        +  ठक्  =  कार्तिक 

सर्वभूमि   +  ठक्  =  सार्वभौमिक ( यहाँ पर " सर्व "और " भूमि " दो शब्द है इसलिए दोनो शब्दो के प्रथम स्वर को वृद्धि होगी अर्थात् सर्व को " सार्व "और भूमि को " भौमि " ) 

विद्या आधारित श्लोक

            विद्या आधारित श्लोक   संस्कृत में बहुत से विद्या आधारित श्लोकों का संकलन उपलब्ध है उन्हीं में से कुछ विद्या आधारित श्लोकों का हि...