Friday, 30 September 2022

क्त प्रत्यय in sanskrit // kt pratyay in sanskrit // क्त प्रत्यय के 15 उदाहरण // example of kt pratyay //

                            क्त प्रत्यय: 


क्त (क् त ) कृदंत प्रत्यय है | इस प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल अर्थ में किया जाता है | " क्त " प्रत्यय का प्रयोग कर्मवाच्य और भाववाच्य में होता है | 

" क्त " प्रत्यय में " क् " का लोप होकर " त " शेष रहता है | इस प्रत्यय का प्रयोग करते समय धातु को गुण और वृद्धि न होकर सम्प्रसारण होता है | 


विशेष :- गत्यर्थक धातु होने पर क्त प्रत्यय का प्रयोग कर्तृवाच्य में भी होता है | इसके रूप तीनो लिंगो में चलते है :- पुल्लिंग में ( राम के समान ) , स्त्रीलिंग में ( रमा के समान ) , नपुंसकलिंग में (फल के न ) | 


धातु       प्रत्यय  पुल्लिंग   स्त्रीलिंग   नपुंसकलिंग 

पठ्    +  क्त    =   पठित:     पठिता     पठितम् 

लिख्  +  क्त     =   लिखित:  लिखिता   लिखितम् 

हस्     +  क्त    =   हसित:     हसिता     हसितम् 

पा      +  क्त     =   पीत:       पीता        पीतम् 

कृ      +  क्त     =   कृत:        कृता        कृतम् 

गम्     +  क्त     =    गत:        गता         गतम् 

आगत् + क्त      =   आगत:    आगता     आगतम् 

त्यज्   +  क्त     =   त्यक्त:      त्यक्ता      त्यक्तम् 

प्रच्छ्   +  क्त     =   पृष्ट:        पृष्टा         पृष्टम् 

दा      +   क्त     =   दत्त:        दत्ता         दत्तम् 

स्ना    +   क्त     =   स्नात:      स्नाता      स्नातम् 

शृ       +   क्त    =  शीर्ण:       शीर्णा      शीर्णम् 

छिद्   +   क्त     =   छिन्न:       छिन्ना       छिन्नम् 

वच्    +   क्त     =   उक्त:       उक्ता        उक्तम् 

वद्     +   क्त     =  उदित:     उदिता      उदितम्

वस्    +   क्त     =  उषित:    उषिता      उषितम् 

वह्     +   क्त     =  ऊढ:       ऊढा        ऊढम् 

इष्     +   क्त     =  इष्ट:        इष्टा          इष्टम् 

लभ्    +   क्त     =  लब्ध:      लब्धा       लब्धम् 

खाद्   +   क्त     =  खादित:  खादिता   खादितम् 

दृश्    +    क्त     =  दृष्ट:        दृष्टा         दृष्टम् 


Tuesday, 27 September 2022

Matup pratyay in sanskrit // मतुप् प्रत्यय in sanskrit // Mt pratyay

                 मतुप् प्रत्यय 

इस प्रत्यय का प्रयोग भाववाचक संज्ञा और विशेषण के रूप में किया जाता है | मतुप् प्रत्यय में अंतिम " उप् " का लोप होकर " मत् " शेष रहता है | यदि शब्दान्त ( शब्द के अंत में ) अ / आ / स् हो तो " मत् " को " वत् " हो जाता है | इस प्रत्यय के रूप तीनो लिंगो में चलते हैं :- पुल्लिंग , स्त्रीलिंग , नपुंसकलिंग ( भवत् शब्द  के अनुसार ) | 

शब्द   प्रत्यय       पुल्लिंग   स्त्रीलिंग   नपुंसकलिंग 

अर्थ    मतुप्        अर्थवान्   अर्थवती    अर्थवत् 

बल      ,,    ,,     बलवान्    बलवती     बलवत् 

गुण      ,,    ,,     गुणवान्    गुणवती     गुणवत् 

रूप      ,,    ,,    रूपवान्     रूपवती    रूपवत् 

ज्ञान      ,,    ,,    ज्ञानवान्    ज्ञानवती    ज्ञानवत् 

प्राण      ,,    ,,    प्राणवान्   प्राणवती    प्राणवत् 

श्री        ,,     ,,   श्रीमान्     श्रीमती      श्रीमत् 

धी        ,,     ,,   धीमान्      धीमती      धीमत् 

शक्ति    ,,     ,,   शक्तिमान्   शक्तिमती   शक्तिमत् 

आयुस्  ,,     ,,   आयुष्मान्   आयुष्मती  आयुष्मत् 

धन       ,,     ,,  धनवान्      धनवती     धनवत् 

गो        ,,     ,,  गोमान्        गोमती      गोमत् 

विचार  ,,     ,,   विचारवान्    विचारवती विचारवत् 

फल     ,,     ,,   फलवान्      फलवती    फलवत् 

तड़ित्   ,,     ,,   तड़ित्वान्     तड़ित्वती   तड़ित्वत् 


इस प्रत्यय को विडियो के द्वारा समझने के लिए यहां क्लिक करें

Friday, 23 September 2022

हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद ( Present tence ) // hindi to sanskrit translation in present tence //

 लट् लकार को English में present tence और हिंदी में वर्तमान काल कहते हैं | 

वर्तमान काल की पहचान है :- है , हूँ , ता है , ती हूँ , ते हैं | 


01. दिल्ली भारत की राजधानी है | 

     दिल्ली भारतस्य राजधानी अस्ति | 

02. बालक विद्यालय जाता है | 

     बालकः विद्यालयं गच्छति | 

03. बालक विद्यालय जाते हैं | 

     बालका: विद्यालयं गच्छन्ति | 

( यहां पर कर्ता को देखने पर ज्ञात होता है कि कर्ता में एकवचन है लेकिन क्रिया को देखने पर ज्ञात होता है कि यह वाक्य तो बहुवचन का है )


04. अशोक खेल खलता है | 

      अशोक: क्रीडां करोति | 

05. हम सब फिल्म देखने के लिये  जाते हैं | 

     वयं चलचित्रं द्रष्टुम् गच्छामः | 

06. माता और पिता फल लाते हैं | 

     माता पिता च फलानि आनयतः | 

07. पेड़ से पत्ता गिरता है | 

     वृक्षात् पत्रं पतति | 

08. छात्रों में पीयूष होशियार है | 

     छात्रेषु पीयूष: चतुरतम: अस्ति | 

09. तुम सब लेख लिखते हो | 

     यूयं लेखं लिखथ | 

10. वह यहां से बस के द्वारा जयपुर जाता है | 

     स: इत: बसयानेन जयपुरम् गच्छति | 

11. अध्यापिका चॉक से लिखती है | 

      अध्यापिका सुधाखंडेन लिखति | 

12. छात्र किताब से पढ़ते हैं |

      छात्रा: पुस्तकेन पठन्ति | 

13. पिता पुत्र के साथ बाजार जाते है | 

     पिता पुत्रेण सह आपणं गच्छति | 

14. विद्यालय के दोनों ओर भवन हैं | 

     विद्यालयं उभयतः भवनानि सन्ति | 

15. जंगल में जानवर रहते हैं | 

      वने पशवः निवसन्ति |  

इस प्रकार से हम लट् लकार ( present tence ) में हिंदी से संस्कृत में अनुवाद कर सकते हैं | 

click करें कुछ नया मिलेगा:-

Tuesday, 20 September 2022

Hindi to sanskrit translation in present tense // अनुवाद लट् लकार में //

  हिंदी से संस्कृत में अनुवाद करते समय पुरुष का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है | 

संस्कृत में तीन पुरुष होते है :- प्रथम पुरुष , मध्यम पुरुष , उत्तम पुरुष |


                 एकवचन     द्विवचन     बहुवचन 

उत्तम पुरुष :-अहं ( मैं )आवां ( हम दोनों ) वयं( हम सब )

मध्यम पुरुष :-त्वं (तुम )युवां (तुम दोनों )यूयं (तुम सब )  

प्रथम पुरुष :- ऊपर लिखे 6 शब्दो को छोड़कर अन्य सभी संज्ञा वाचक और सर्वनाम वाचक शब्द प्रथम पुरुष में आते है |

लट्  लकार ( वर्तमान काल ) present tense 

1. मैं पत्र लिखता हूँ   :-  अहं पत्रं लिखामि | 

2. तुम विद्यालय जाते हो :- त्वं विद्यालयं गच्छसि | 

3.  बालक पुस्तक लाता है :- बालकः पुस्तकं आनयति | 

4. शिष्य फल लाते हैं  :- शिष्या: फलानि आनयन्ति | 

5. हम सब फूल सूंघते  हैं   :- वयं पुष्पाणि जिघ्रामः | 

6. तुम दोनों गीत गाते हो    :- युवां गीतं गायथ: | 

7. आप दोनों भोजन पकाती हो :-भवत्यौ भोजनं पचत: | 

8. हम दोनों पुस्तक पढ़ते हैं  :- आवां पुस्तकं पठाव: | 

हिंदी से संस्कृत में अनुवाद का वीडियो देखने के लिये क्लिक करे

Monday, 19 September 2022

Translation Hindi to Sanskrit // अनुवाद हिंदी से संस्कृत //

                हिंदी से संस्कृत में अनुवाद 

संस्कृत में अनुवाद करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है | 

1. कर्ता के अनुसार ही क्रिया में परिवर्तन होता है |

    The verb changes according to the subject .

2. पुरुष और वचन के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है |

   There is a change in the verb according to the person and the       number .

3. संस्कृत में अनुवाद करने के लिए कारक चिह्नों का ज्ञान होना अत्यावश्यक है | कारक      चिह्नों के अनुसार ही विभक्ति में  परिवर्तन होता है |

              अनुवाद का विडियो देखने के लिए यहां क्लिक करे :-                        कारक और कारक चिह्न :-  

   विभक्ति           कारक          कारक चिह्न 

 प्रथमा                 कर्ता              ने 

 द्वितीया               कर्म               को 

 तृतीया                करण              से , के द्वारा  

चतुर्थी                 सम्प्रदान          के लिए   

पंचमी                 अपादान        से ( अलग होने के अर्थ में ) 

षष्ठी                सम्बन्ध         का , के , की , रा , रे , री    

सप्तमी             अधिकरण          में , पे , पर 

                       सम्बोधन           हे , अरे 


इन चिह्नों को ध्यानपूर्वक देखने पर ज्ञात होता है कि " से " का प्रयोग दो स्थानों पर हुआ है :- 1. तृतीया और 2. पंचमी विभक्ति में | यहाँ पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है कि तृतीया विभक्ति में " से " का प्रयोग एक साधन के रूप में किया जाता है जैसे :- मैं कलम से लिखता हूं | यहां पर कलम लिखने का साधन है |

          पेड़ से पत्ता गिरता है | यहां पर पत्ता पेड़ से अलग हो गया अर्थात पंचमी में " से " का प्रयोग अलग होने के अर्थ में किया जाता है |  


Friday, 16 September 2022

अस् धातु रूप पांचों लकारो में

  

अस् धातु रूप पांचों लकारो में ।

       लट् लकार ( वर्तमान काल )

पुरुष   एकवचन   द्विवचन    बहुवचन

प्रथम  अस्ति       स्त:         सन्ति

मध्यम असि        स्थ:         स्थ

उत्तम   अस्मि      स्व:          स्म:


         लङ् लकार ( भूतकाल )

पुरुष  एकवचन   द्विवचन   बहुवचन

प्रथम  आसीत्     आस्ताम्  आसन्

मध्यम आसी:      आस्तम्    आस्त

उत्तम   आसम् ‌     आस्व      आस्म


          लोट् लकार ( आज्ञार्थ योगे )

पुरुष   एकवचन   द्विवचन   बहुवचन

प्रथम   अस्तु        स्ताम्       सन्तु

मध्यम  एधि         स्तम्        स्त 

उत्तम    असानि    असाव     असाम


    विधिलिङ् लकार ( चाहिए अर्थ में)

पुरुष   एकवचन   द्विवचन    बहुवचन

प्रथम   स्यात्         स्याताम्     स्यु:

मध्यम  स्या:          स्यातम्      स्यात

उत्तम   स्याम्         स्याव         स्याम


         लृट् लकार ( भविष्यत् काल )

पुरुष   एकवचन    द्विवचन    बहुवचन

प्रथम   भविष्यति   भविष्यत: भविष्यन्ति

मध्यम  भविष्यसि  भविष्यथ: भविष्यथ

उत्तम    भविष्यामि भविष्याव: भविष्याम:


क्लिक करें धातु रूप याद करने का आसान तरीका बताया गया है :-

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