क्त प्रत्यय:
क्त (क् त ) कृदंत प्रत्यय है | इस प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल अर्थ में किया जाता है | " क्त " प्रत्यय का प्रयोग कर्मवाच्य और भाववाच्य में होता है |
" क्त " प्रत्यय में " क् " का लोप होकर " त " शेष रहता है | इस प्रत्यय का प्रयोग करते समय धातु को गुण और वृद्धि न होकर सम्प्रसारण होता है |
धातु प्रत्यय पुल्लिंग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंग
पठ् + क्त = पठित: पठिता पठितम्
लिख् + क्त = लिखित: लिखिता लिखितम्
हस् + क्त = हसित: हसिता हसितम्
पा + क्त = पीत: पीता पीतम्
कृ + क्त = कृत: कृता कृतम्
गम् + क्त = गत: गता गतम्
आगत् + क्त = आगत: आगता आगतम्
त्यज् + क्त = त्यक्त: त्यक्ता त्यक्तम्
प्रच्छ् + क्त = पृष्ट: पृष्टा पृष्टम्
दा + क्त = दत्त: दत्ता दत्तम्
स्ना + क्त = स्नात: स्नाता स्नातम्
शृ + क्त = शीर्ण: शीर्णा शीर्णम्
छिद् + क्त = छिन्न: छिन्ना छिन्नम्
वच् + क्त = उक्त: उक्ता उक्तम्
वद् + क्त = उदित: उदिता उदितम्
वस् + क्त = उषित: उषिता उषितम्
वह् + क्त = ऊढ: ऊढा ऊढम्
इष् + क्त = इष्ट: इष्टा इष्टम्
लभ् + क्त = लब्ध: लब्धा लब्धम्
खाद् + क्त = खादित: खादिता खादितम्
दृश् + क्त = दृष्ट: दृष्टा दृष्टम्